मप्र: नए बजट में जनता का खून चूसने की तैयारी

भोपाल। कम से कम मप्र में तो 'बुरे दिन आने वाले हैं' पेट्रोल/डीजल पर वैट टैक्स बढ़कार मप्र में मंहगाई बनाए रखने वाली शिवराज सरकार अब कुछ नए टैक्स लगाकर या पुराने टैक्सों को बढ़ाकर जनता का खून चूसने की तैयारी कर रही है। सरकार आय का सबसे आसान जरिया टैक्स बढ़ाने पर फोकस कर रही है, इनकम का कोई और रास्ता उसे सूझ ही नहीं रहा। मोदी सरकार से भी शिवराज को कोई खास मदद नहीं मिल पा रही है।

भरपूर भ्रष्टाचार के चलते खाली हुए सरकारी खजाने को फिर से भरने के लिए यह कवायद की जा रही है। जनता के सामने इसे विकास के लिए मजबूरी में उठाया गया कदम बताया जाएगा।
हालांकि वित्त मंत्री जयंत मलैया इस तरह की संभावनाओं को नकारते रहे हैं।

65-35 का है रेश्यो
पिछले बजट में नान प्लान एक्सपैंस 65 हजार करोड़ के आसपास थे। जबकि सोशन सेक्टर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास की मदों में 35 हजार करोड़ रुपए की राशि आयी थी। टैक्स टारगेट इस वित्तीय वर्ष का 22 हजार 500 करोड़ रुपए रखा गया था। इस लक्ष्य की तुलना में अभी तक 14 हजार करोड़ रुपए के लगभग टैक्स कलेक्शन हुआ है। ऐसे में आने वाले फाइनेंशियल ईयर में हालातों को सुधारने के लिए सरकार के पास खास साधन गैर आयोजनेत्तर व्यय में कटौती भर का नजर आ रहा है।

वेतन-भत्तों पर 32000 करोड़
प्रदेश सरकार का वेतन-भत्तों पर खर्च 32 हजार करोड़ रुपए है। कुल बजट में 30 परसेंट से ज्यादा की राशि इस मद में व्यय होती है। आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि दिग्जिवय सरकार में कुल 4.50 लाख कर्मचारी और पेंशनर्स थे। आज यह संख्या आज 11 लाख पार हो चुकी है। प्रदेश सरकार ने हर क्षेत्र में तमाम प्रयास किए हैं, लेकिन नौकरियां देने के मामले में सरकार कटौती के कदम नहीं उठा पायी। शायद यही वजह है कि स्थापना व्यय लगातार बढ़ा है।

कर्ज सीमा बढ़ाने पर जोर
अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश भी केंद्र सरकार से कर्ज के लिए तय सीमा में बढ़ोतरी के प्रयास कर रही है। केंद्र से मांग करने वालों में मध्यप्रदेश शामिल है। प्रदेश राज्य के सकल घरेलू उत्पाद पर राजकोषीय घाटा छह प्रतिशत करने की मांग कर रहा है। यह सीमा अभी तीन प्रतिशत है। दरअसल कर्ज ले सकने की सीमा में बढ़ोतरी की मांग सरकार पुरजोर ढंग से इसलिए कर रही है क्योंकि एक वक्त में कर्ज पर ब्याज एक दौर में 22 प्रतिशत जाया करता था, आज यह सीमा 8 प्रतिशत है। सरकार के पास पर्याप्त गुंजाइश है।

प्रदेश और जनता दोनों के लिए हितकर होगा बजट
कुछ कठिनाईयां हैं। सरकार हरेक स्थिति से निपटने में सक्षम है। यह सही है कि टैक्स टारगेट में कुछ पीछे हैं। चूंकि अभी दो माह का वक्त है, लिहाजा उम्मीद है लक्ष्य की पूर्ति कर लेंगे। जहां तक आगामी बजट का सवाल है, कह सकते हैं - प्रदेश और जनता दोनों के लिए यह हितकर होगा।
जयंत मलैया, वित्त मंत्री - मप्र


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