इस धमकी से कितना कमाएंगे कटारे

shailendra gupta
उपदेश अवस्थी/भोपाल। क्षमा कीजिए सत्यदेव जी, परंतु क्या करें पिछला अनुभव ऐसा ही रहा है। कांग्रेस के नेता लोग सभाओं में धमाका फोड़ने का इशारा करते हैं और राजधानी में आते ही चुप हो जाते हैं। आप इन नेताओं से इतर हो सकते हैं परंतु इसके लिए खुद को साबित करना होगा।

विषय मध्यप्रदेश में 40 हजार फर्जी कर्मचारियों का है। विषय निश्चित रूप से बहुत गंभीर है। अब आप नेताप्रतिपक्ष हैं तो यह भी तय है कि आपने यूं ही सुनीसुनाई बात को हवा नहीं दी होगी। आपके पास तथ्य होंगे और पर्याप्त साक्ष्य भी कि मध्यप्रदेश में 40 हजार कर्मचारी फर्जी नियुक्तियां प्राप्त कर चुके हैं। तभी तो भरी आमसभा में आपने यह हुंकार भरी है।

अब सवाल केवल इतना है कि क्या यदि आपके पास साक्ष्य मौजूद हैं तो इसका खुलासा एक महीने बाद करने की क्या जरूरत है। आज ही क्यों नहीं कर डालते। ये एक महीने का समय आप किसे दे रहे हैं, क्या उन कर्मचारियों को जिन्होंने फर्जी नौकरियां हासिल कीं या उन अधिकारियों को जिन्होंने मध्यप्रदेश में नौकरी घोटाला किया। बस आपके एक महीने बाद खुलासा करने की घोषणा ने ही आप पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

हम बेहतर जानते हैं कि इन दिनों आप सीएम शिवराज सिंह चौहान से नाराज हैं। बत्ती तो इसलिए लौटाई थी क्योंकि यह कांग्रेस की परंपरा रही है परंतु कार इसलिए लौटाई क्योंकि बंगला नहीं मिला, मनचाहा स्टाफ नहीं मिल रहा। सुविधाएं नहीं मिल रहीं। भाजपा के मंत्रियों ने आप पर प्रेशर बना रखा है। विधानसभा में आपकी रैगिंग ली गई। पहली ही बार में आपको खुद सीएम ने ही नैतिकता का पाठ पढ़ा डाला। कुल मिलाकर शिवराज सरकार ने आपकी पक्की घेराबंदी कर रखी है।

कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी प्रेशर का जवाब आप एक नया हौआ क्रिऐट करके दे रहे हैं। यदि एक महीने में सीएम प्रेशर में आ गए और उन्होंने आपको सुविधाएं व सम्मान मुहैया करा दिया और इस घोटाले में शामिल अफसर आपको आवंटित सरकारी बंगले पर पेचअप करने जा पंहुचे तो आप मामले की हवा निकाल देंगे। जैसा कि पहले भी होता रहा है।

क्षमा कीजिएगा, परंतु क्या करें मध्यप्रदेश विधानसभा में जब से कांग्रेस विपक्ष में बैठी है ऐसे तमाम उदाहरण सामने आ चुके हैं। सभाओं में क्या, सदन में सवाल उठाने के बाद कांग्रेसी विधायक और कई बार नेताप्रतिपक्ष अचानक चुप हो गए थे। आप कितने ईमानदार हैं यह आपको साबित करना होगा। यह मामला आपका पहला परीक्षण है। देखते हैं क्या कुछ होता है इस मामले में।


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