भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) का सत्र 2013-14 को शून्य बर्ष घोषित कर देने से कॉलेजों को करीब सौ करोड़ रुपए का नुकसान छेलना पड़ रहा है। प्रत्येक कॉलेज को शून्य सत्र में 25 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। प्रदेश के प्रमुख शहरों में सबसे ज्यादा 14.50 करोड़ रुपए का कुल नुकसान भोपाल के कॉलेजों को उठाना पड़ रहा है।
इतने बड़े आर्थिक नुकसान से सकते में आए कॉलेज संचालक अब उच्च शिक्षा विभाग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में जुट गए हैं। शासन द्वारा बीएड सत्र को शून्य घोषित करने के बाद निजी कॉलेज संचालक व उच्च शिक्षा विभाग आमने सामने आ गए हैं। सत्र 2013-14 को शुरू करने में हुई लेटलतीफी पर कॉलेज संचालक व उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं।
इस पर उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सत्र 2013-14 के लिए एडमिशन कराने का समय निकल चुका है। इसके लिए कॉलेज संचालक ही जिम्मेदार हैं। निजी कॉलेजों की मांग पर पिछले तीन चार सालों से एडमिशन की तारीख आगे बढ़ाने के कारण ही सत्र लगातार लेट होते गए हैं। वहीं निजी कॉलेज संचालक इस लेटलतीफी का ठीकरा उच्च शिक्षा विभाग पर ही फोड़ रहे हैं। निजी कॉलेज संचालकों का कहना है कि मान्यता संबंधी प्रकरणों में देरी करने के कारण ही समय पर सत्र शुरू नहीं हो सके हैं।
इस पूरे मामले में निजी कॉलेज संचालकों को जहां बड़े आर्थिक नुकसान की भरपाई की फिक्र सता रही है वहीं उच्च शिक्षा विभाग गुणवत्तायुक्त शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बता रहा है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा जून 2013 में जारी मान्यता प्राप्त बीएड कॉलेजों की सूची के अनुसार प्रदेश में कुल 396 कॉलेजों में कोर्स संचालित किया जा रहा है तथा सीटों की संख्या 40 हजार 870 है।
शासन का तर्क: आयुक्त उच्च शिक्षा वीएस निरंजन का कहना है कि शासन की प्राथमिकता शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना है। एक सत्र के बीच ही दूसरे सत्र के लिए एडमिशन की प्रक्रिया शुरू करना संभव नहीं है। शासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंधा हुआ है। सत्र 2012-13 के बीएड कोर्स के लिए जो अध्ययन दिवस निर्धारित हैं वो अक्टूबर 2013 के अंत तक पूर्ण होंगे। नवंबर व दिसंबर 2013 में परीक्षाएं आयोजित की जाएगी। ऐसी स्थिति में सत्र 2013-14 का सत्र 1 जुलाई 2013 से शुरू करना असंभव था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने विज्ञापन से लेकर कक्षाएं शुरू करने तक की कार्रवाई 28 जून 2013 तक पूरी करने के निर्देश दिए थे।
कॉलेजों की परेशानी: वहीं प्रादेशिक शिक्षा महाविद्यालय प्रबंधन संघ के संगठन सचिव अवनींद्र उपाध्याय के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का आदेश 13 दिसंबर 2012 को ही आ गया था। अगर उच्च शिक्षा विभाग पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर इस मामले में कोई फैसला ले लेता तो सत्र को शून्य घोषित होने से बचाया जा सकता था। विभाग के आदेश को देरी से जारी करने के कारण हजारों स्नातक छात्र जो बीएड में एडमिशन की राह देख रहे थे वे स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश नहीं ले सके। इससे कॉलेजों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। संघ के पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।
प्रमुख शहरों में शून्य वर्ष से होने वाला नुकसान
शहर कॉलेज सीटें नुकसान (करोड़ रुपए में)
भोपाल - 58 5800 14.50
इंदौर - 27 2700 6.75
जबलपुर - 26 2600 4.50
ग्वालियर - 40 4000 10