भाजपा ने जितने भी बांध बनवाए, ज्यादातर फूट गए: मानक

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मानक अग्रवाल ने कहा है कि अब यह सच खुलकर सामने आ रहा है कि भाजपा शासन काल में सिंचाई से संबंधित बांध, नहर आदि जितने भी संसाधन निर्मित हुए हैं, उनमें भारी भ्रष्टाचार हुआ है और उनके निर्माण में निर्धारित मानकों तथा गुणवत्ता की जरा भी परवाह नहीं की गई है।

नतीजन पिछले वर्षाकाल में करोड़ों की लागत से बने कई बांध फूट गए और बड़ी संख्या में नहरें भी फूट गईं। इस कारण जो किसान रबी के वर्तमान सीजन में इन जल संसाधनों से अपने खेतों में सिंचाई की उम्मीद लगाये बैठे थे, उनको भारी निराशा हाथ लग रही है। ऐसे वाकये भी सामने आये हैं, जिनमें घटिया नहरों ने आस-पास के खेतों में खड़ी रबी की फसल को बर्बाद करके किसान को आर्थिक संकट में डाल दिया है।

मानक ने कहा कि नगरों के फूट जाने से प्रदेश में जहां-जहां किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है, उसका अविलंब सर्वे करवाकर जिला प्रशासन द्वारा मुआवजे का भुगतान करने की मांग की है।

श्री अग्रवाल ने कहा है कि पिछले दिनों सतना जिले में खम्हरिया तिवरियान में बाण सागर बांध की पुरवा नहर फूट जाने से किसानों के खेतों में पानी भर जाने के कारण फसलें बर्बाद हो गई हैं।

इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, लेकिन जिला प्रशासन नहर फूटने को प्राकृतिक आपदा मानने से इंकार कर रहा है। हालांकि नहर के पानी से खेतों में हुए नुकसान का आकलन हो चुका है। लेकिन मुआवजे के प्रकरण तैयार नहीं हो रहे हैं। अब पीडि़त किसान मुआवजे के लिए बाण सागर बांध प्रबंधन की ओर ताक रहे हैं।

उन्होंने कहा है कि मुआवजा बाण सागर बांध प्रबंधन दे या जिला प्रशासन, प्रभावित किसानों को मुआवजे का भुगतान होना चाहिए। इस संबंध में कलेक्टर की ओर से पहल करना आवश्यक है।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष ने आगे कहा है कि सतना जिले मंे ही पुरवा नदी के अलावा नागौद क्षेत्र में अमरन नदी पर बने स्टाॅप डेम के निर्माण में भी भ्रष्टाचार की बू आ रही है। यह डेम भी पिछले अगस्त महीने में बह चुका है। इसी प्रकार अमर पाटन तहसील के इटमा कोठार का बांध भी पिछली बरसात में फूट चुका है। इन दोनों बांधों पर करीब दो करोड़ रूपये खर्च हुए थे।

श्री अग्रवाल बोले कि नहर के नाम पर किसानों से उनकी जमीनें जबरिया छीनने की शिकायतें भी मिल रही हैं। सतना जिले के भूमिहीन किसानों को 45 वर्ष पूर्व दी गई जमीनें नहर निर्माण के लिय ली जा रही हैं। जिला प्रशासन की इस कार्यवाही के फलस्वरूप करीब 150 किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। 

किसानों के पास भू-अधिकार पुस्तिका भी है और वे 1974 के बाद से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं। आपने प्रभावित किसानों को नहर के लिये ली जा रही जमीनों के बदले नहर के पास ही कृषि भूमि आवंटित करने और आवश्यक आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
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