भोपाल। क्या आपने कभी कोई ऐसा अधिकारी देखा है जिसने भ्रष्टाचार के सारे तरीके एक साथ आजमाए हों। आज जो खुलासा हुआ है, उसमें एक ऐसे अधिकारी का पता चला है जिसने मृतआत्माओं से मजदूरी कराई, स्कूटर को ट्रक बताकर भाड़े पर लगाया, लाखों रुपए के पेमेंट नगद कर डाले, अपने नौकर को ठेकेदार बता दिया, सरपंच के नाम फर्जी भुगतान कर डाला और क्या क्या हुआ इसकी लम्बी फेहरिस्त है।
मामला पन्ना जिले के उत्तर वनमण्डल के तहत हुए उन विकासकार्यों का है जो बुन्देलखण्ड विशेष विकास पैकेज के तहत कराए गए थे। राहुल गांधी की यात्रा के बाद केन्द्र सरकार ने इस इलाके के विशेष उत्थान के लिए करोड़ों का बजट भेजा, लेकिन वो अधिकारियों ने कैसे डकारा इसकी एक बानगी मात्र है यह जांच रिपोर्ट जो अभी विस्तृत रूप से आना शेष है।
कांग्रेस विधायक श्रीकांत दीक्षित की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच के प्रथम चरण में योजना आयोग की एक टीम बीते रोज यहां आई। टीमलीडर एनआरएआई के सीईओ जेएस ताबरा हैं। पन्ना जिले में उत्तर वनमण्डल द्वारा किए गए विकास कार्यों की जांच की गई। जांच में प्राथमिक तौर पर पाया गया कि:—
- यह सभी विकास कार्य डीएफओ अमित दुबे द्वारा कराए गए हैं।
- तालाब निर्माण में जिस ट्रक नंबर को पेमेंट किया गया, वह ट्रक नहीं बल्कि स्कूटर था।
- फर्जी ठेकेदारों की लिस्ट मिली, जिनमें नौकर एवं दिहाड़ी श्रमिक शामिल हैं। लाखों का भुगतान किया गया
- ऐसे लोगों के नाम श्रमिकों की सूची में मिले जिनका देहांत वर्षों पहले हो चुका है।
- पंचायत इटावा के सरपंच एवं एक अन्य व्यक्ति के नाम पेमेंट दिखाए गए, जबकि सरपंच को फूटी कोड़ी भी नहीं मिली, उसके पास ट्रेक्टर भी नहीं था।
- नियमानुसार 20 हजार से अधिक के पेमेंट चैक द्वारा किए जाने थे, लेकिन लाखों का भुगतान नगद कर दिया गया।
इसके अलावा भी बहुत कुछ हुआ। सबका खुलासा टीम की विस्तृत रिपोर्ट के बाद मिलेगा।