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भोपाल में मोदी के फर्जी विज्ञापन के बाद फर्जी शिविर भी लगे

Monday, August 1, 2016

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भोपाल। राजधानी में खुलेआम फर्जीवाड़ा हो गया और मामला नोटिस में आने के बाद भी सरकार ने उसे नहीं रोका। मुद्दा बिल्डर्स की एक संस्था क्रेडाई द्वारा बिना अनुमति लगाए गए 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के शिविर का है। इस शिविर का विधिवत फुल पेज विज्ञापन जारी किया गया। नगरीय विकास मंत्री माया सिंह ने इस विज्ञापन को गलत बताते हुए एफआईआर का कराने का ऐलान भी किया लेकिन शिविर का आयोजन नहीं रोका गया। रविवार को 3 स्थानों पर शिविर का आयोजन हुआ और 5000 रजिस्ट्रेशन किए गए। 

यहां से शुरू हुआ किस्सा
30 जुलाई 2016 को एक प्रमुख हिन्दी अखबार में पहले पेज पर फुल पेज विज्ञापन जारी हुआ। विज्ञापन देखने के लिए यहां क्लिक करें। इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सीएम शिवराज सिंह, नगरीय विकास मंत्री माया सिंह एवं महापौर आलोक शर्मा के फोटो के साथ 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत राजधानी के 3 स्थानों पर शिविर आयोजित करने की सूचना दी गई। यह विज्ञापन पूरी तरह से सरकारी दिखाई दे रहा था। विज्ञापन में स्पष्ट रूप से लिखा भी गया 'नगर निगम भोपाल एवं क्रेडाई का अभिनव प्रयास'। इस आयोजन में कुल 11 बिल्डर्स शामिल हुए थे। जो अपनी प्रॉपर्टी इस योजना के नाम पर बेचना चाहते थे। 

फिर हुई शिकायत 
आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इसकी शिकायत पीएमओ एवं सीएम आॅफिस से की। सीएम आॅफिस से तो कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई लेकिन पीएमओ ने इस पर आपत्ति उठाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो बिना अनुमति कैसे उपयोग कर ली गई जबकि यह आयोजन सरकारी नहीं है। 

मंत्री ने दिया बयान: एफआईआर कराएंगे
बवाल मचा तो नगरीय विकास मंत्री माया सिंह ने बयान दिया कि यह सरकारी आयोजन नहीं है एवं विज्ञापन बिना अनुमति के जारी किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि हम फर्जीवाड़ा करने वाले बिल्डर्स के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। एफआईआर कराई जाएगी। 

निगम कमिश्नर ने क्या कहा
इसके बाद नगर निगम कमिश्नर छवि भारद्वाज का बयान आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आयोजन से नगर निगम का कोई लेना देना नहीं है। अत: स्पष्ट हुआ कि यह आयोजन निगम एवं क्रेडाई का संयुक्त आयोजन नहीं है, बल्कि अपनी बिना बिकी प्रॉपर्टी को हाउसिंग फॉर आॅल के नाम पर ठिकाने लगाने की योजना है। 

संडे को लगे शिविर, नहीं हुई कार्रवाई
तमाम बवाल मचने के बावजूद सरकार की ओर से इस आयोजन को रोका नहीं गया, बल्कि धूमधाम के सामने खुलेआम अनाधिकृत शिविर लगाए गए। सोमवार को दैनिक भास्कर के पेज क्रमांक 2 में प्रकाशित एक खबर के अनुसार क्रेडाई के अध्यक्ष वासिक हुसैन ने एक बार फिर इसे नगर निगम एवं क्रेडाई का संयुक्त आयोजन बताया एवं दावा किया गया कि तीनों शिविरों में कुल 5000 रजिस्ट्रेशन हो गए हैं। 

मिली भगत सामने आई
कुल मिलाकर इस मामले में मप्र सरकार की 12 बिल्डर्स के साथ मिली भगत सामने आ गई है। सरकार ने अब तक ना तो एफआईआर कराई और ना ही सरकारी योजना के नाम पर लोगों को मिस गाइड करके अपनी प्रॉपर्टी बेचने के लिए लगाए गए शिविर को रोकने का प्रयास किया। महापौर आलोक शर्मा की इस मामले में संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है, क्योंकि शिविर के पहले जारी उनके एक बयान में उन्होंने शिविर का जिक्र किया था और विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं किया। 
वह विज्ञापन जिस पर हुआ विवाद देखने के लिए यहां क्लिक करें
शिविर से पहले प्रकाशित कराई गई खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
शिविर के बाद प्रकाशित कराई गई खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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