डॉ अवधेश कुमार | श्री दुर्गा सप्तशती में तीन रात्रियों का उल्लेख मिलता है -कालरात्रि (होली), महारात्रि (शिवरात्रि), मोह रात्रि (दीपावली)। निर्णयामृतकार ने अमावस्या में कौमुदी महोत्सव का उल्लेख किया है। यह कौमुदी महोत्सव पांच-दिवसीय कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक मनाया जाता है। त्रेता युग में समस्त देवी देवता रावण वध के साक्षी हुए। इसके बाद श्री राम के अयोध्या वापस आने पर, इसी त्यौहार को दीपावली के नाम से मनाया जाने लगा। पूजा का विधान आज भी वही है।
पुराणों में छोटी दीपावली की कहानी
कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी में भगवान धन्वंतरी के पूजन के साथ साथ, नूतन वस्त्र, सोना चांदी पात्र आदि के पूजन का विधान है। कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दीपावली (रूप चौदस) के रूप में मनाया जाता है, इसीलिए यमराज व भगवान् श्री कृष्ण का पूजन व सायंकाल दीपदान करना चाहिए। पुराणों के अनुसार आज के दिन भगवान् श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध करके संसार को भयमुक्त किया था।
स्कन्द-पुराण, पद्म पुराण व भविष्य पुराण में दीपावली की कथा
दीपावली के सन्दर्भ में स्कन्द-पुराण, पद्म पुराण व भविष्य पुराण में कथा मिलती है-
1. महाराज पृथु ने पृथ्वी का दोहन कर देश को धन-धान्य से समृद्ध किया, प्रजा ने दीपोत्सव के रूप में यह पर्व मनाया।
2. समुद्र मन्थन के समय भगवती लक्ष्मी के प्रादुर्भूत होने की प्रसन्नता से जनमानस उल्लास के साथ दीपोत्सव मनाते आ रहे हैं।
3.श्रीराम के विजयोपलक्ष्य में अयोध्या में उनके स्वागतार्थ दीप प्रज्ज्वलित करके दीपोत्सव पर्व (दीपावली) मनाया। दीपावली पर विशेष रूप से भगवान् श्री गणेश सहित लक्ष्मी नारायण व कुबेर आदि के पूजन का विधान है।
उत्तम मुहुर्त - दिनांक 08/11/2026 को सांयकाल में 6.32pm से 10.27 pm के बीच 16 दीपक अथवा 32 दीपक प्रज्वलित करके श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त का विधिवत पाठ करते हुए ऊं महालक्ष्म्यै नमः मन्त्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
अमावस्या दीपावली में किया गया पूजन पाठ, व अनुष्ठान अनन्त फल देता है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा में गोवर्धन पूजा व अन्नकूट का महत्व है, भगवान गोवर्धन का पूजन व गौवंश के संरक्षण का सन्देश मिलता है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भ्रातृ पूजा (भाई दूज) उत्सव मनाया जाता है। जिसमें भाई- बहन के नि:स्वार्थ प्रेम व समर्पण का पर्व है।
लेखक: डॉ अवधेश कुमार श्रोत्रिय, सहायक प्राचार्य, स्नातकोत्तर ज्योतिष विभाग कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा बिहार व उत्तराधिकारी ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा आश्रम एवं यज्ञ पूर्णा गौशाला नवीन छावनी पठार भोपाल मध्यप्रदेश हैं।

