BHARAT : महिला कर्मचारियों के हित में सुप्रीम कोर्ट का लैंडमार्क जजमेंट एवं वर्कप्लेस की कानूनी परिभाषा

नई दिल्ली, 11 दिसंबर 2025
: राजस्व विभाग की महिला कर्मचारी का पीडब्ल्यूडी के ऑफिस में किसी पुलिस अधिकारी द्वारा सेक्सुअल हैरेसमेंट किया जाता है तो महिला कर्मचारी किस इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) में शिकायत करेगी? इस गंभीर प्रश्न का उत्तर सुप्रीम कोर्ट ने दिया है और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रश्न हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा IRS अधिकारी की अपील खारिज

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने एक IRS अधिकारी की अपील को खारिज कर दिया। अपीलकर्ता पर आरोप था कि 15 मई 2023 को नई दिल्ली के कृषि भवन में एक महिला IAS अधिकारी का उसके ही ऑफिस में यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने अपने डिपार्टमेंट (खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय) की ICC में POSH Act के तहत शिकायत दर्ज की और FIR भी हुई।

CAT और हाईकोर्ट ने भी अपील खारिज की थी

IRS अधिकारी ने दलील दी कि वह राजस्व विभाग का कर्मचारी है इसलिए केवल CBDT की ICC ही शिकायत की जांच कर सकती है। उसने पहले CAT और फिर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन दोनों जगह उसकी बात खारिज हो गई। आखिर में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

POSH Act: शिकायत किस कमेटी में करना चाहिए

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि POSH Act में कहीं यह नहीं लिखा कि आरोपी (respondent) उसी वर्कप्लेस का कर्मचारी होना चाहिए जहां पीड़िता काम करती है। कोर्ट ने कहा, “अगर हर बार पीड़िता को आरोपी के वर्कप्लेस की ICC के पास जाना पड़े तो यह कानून का मकसद ही खत्म हो जाएगा। इससे पीड़िता के सामने बहुत सारी प्रैक्टिकल दिक्कतें आएंगी।”

POSH एक्ट के तहत वर्कप्लेस की कानूनी परिभाषा

कोर्ट ने POSH एक्ट की धारा 2(o) में दी गई वर्कप्लेस की व्यापक परिभाषा का हवाला देते हुए कहा कि वर्कप्लेस में वह सारी जगहें शामिल हैं जहां कर्मचारी रोजगार के सिलसिले में जाती है। इसलिए पीड़िता की ICC को दूसरे डिपार्टमेंट के कर्मचारी पर भी जांच का अधिकार है।

इस फैसले से अब सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर की महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर जब हैरासमेंट किसी विजिटर, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी या दूसरे विभाग के अधिकारी से हो।

संबंधित अन्य अपडेट:
- इसी साल जुलाई 2025 में DoPT ने एक OM (16.07.2025) जारी किया था जिसमें स्पष्ट किया गया कि अलग-अलग विभागों की ICC एक-दूसरे के साथ सहयोग करेंगी और जरूरत पड़ी तो आरोपी के डिपार्टमेंट की ICC बाद में डिसिप्लिनरी प्रोसीडिंग के लिए जांच अधिकारी का रोल निभा सकती है।
- पिछले महीने बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी एक प्राइवेट कंपनी के मामले में यही सिद्धांत अपनाया था कि बाहरी वेंडर या क्लाइंट द्वारा हैरासमेंट होने पर कंपनी की अपनी ICC ही प्राइमरी जांच करेगी।

यह फैसला POSH एक्ट को और मजबूत बनाता है और महिलाओं के लिए शिकायत करने की प्रक्रिया को आसान बनाता है। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी
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