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इंडोनेशिया में मौत का तांडव जारी, अब तक 222 मौतों की खबर, तस्वीरों में देखिए तबाही | WORLD NEWS

23 December 2018

नई दिल्ली। इंडोनेशिया में समुद्र के रास्ते आई मौत सुमात्रा द्वीप पर तांडव कर रही है। सुनामी के कारण यहां चारों तरफ तबाही का मंजर नजर आ रहा है। अब तक 222 लोगों के मरने की सूचना है। कई लोग लापता हैं। 843 से अधिक लोगों के घायल हालत में जिंदा मिले हैं। 

इंडोनेशिया के अधिकारियों ने जानकारी दी कि क्रैकटो ज्वालामुखी के 'चाइल्ड' कहे जाने वाले अनक ज्वालामुखी के फटने से यह सुनामी आई है। वहीं, वैज्ञानिकों का कहना है कि इस द्वीप का निर्माण क्रैकटो ज्वालामुखी के लावा से हुआ है। बताया जा रहा है कि इस ज्वालामुखी में आखिरी बार अक्टूबर में विस्फोट हुआ था।

बढ़ सकती है मृतकों की संख्या

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पूर्वो नुग्रोहो ने बताया कि मरने वालों का आंकड़ा अभी बढ़ सकता है। खबर लिखे जाने तक 843 लोगों के घायल होने और 28 के लापता होने की सूचना है।

समुद्र के अंदर हुआ भूस्खलन
अधिकारियों की मानें तो अनक के फटने की वजह से समुद्र के अंदर लैंडस्लाइड हुआ, जिसके कारण लहरों में असामान्य परिवर्तन आया। इस कारण सुनामी आई। इन आंकलनों के अलावा इंडोनेशिया की जियोलॉजिकल एजेंसी सुनामी के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

चश्मदीद फोटोग्रॉफर का बयान

आपदा प्रबंधन एजेंसी ने कहा कि तेज हवाओं के कारण समुद्री में और ऊंची लहरे उठ सकती हैं। वेस्ट जावा के एनयर बीच पर मौजूद नार्वे के फोटोग्रॉफर ओएस्टीन लुंड एंडरसन ने कहा, 'मैं समुद्र तट से विस्फोटित हो रहे क्राकाटोआ ज्वालामुखी की तस्वीरें ले रहा था। मैं अकेला था और मेरे परिवार कमरे में सो रहा था।

बाढ़ का पानी सड़कों पर
उन्होंने आगे बताया, 'शाम के वक्त ज्वालामुखी में काफी विस्फोट हुए लेकिन समुद्र पर उठीं तेज लहरों से ठीक पहले वहां कोई गतिविधि नहीं हो रही थी लेकिन अचानक मैंने समुद्र की लहरें आती देखीं और मैं वहां से भागा।' आपदा एजेंसी के प्रवक्ता द्वारा साझा फुटेज में सुनामी के बाद बाढ़ का पानी सड़कों पर बहता नजर आ रहा है।

उफान का कारण पूर्णिमा

इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी के वैज्ञानिकों ने कहा कि अनाक क्राकाटाओ ज्‍वालामुखी के फटने के बाद समुद्र के नीचे भूस्खलन सुनामी का कारण हो सकता है। उन्होंने लहरों के उफान का कारण पूर्णिमा के चंद्रमा को भी बताया।

रात 9 बजे उठीं लहरों ने संभलने का मौका तक नहीं दिया
देश की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता स्तुपो पुर्वो ने बताया कि शनिवार को स्थानीय समयानुसार रात लगभग साढ़े नौ बजे दक्षिणी सुमात्रा और पश्चिमी जावा के पास समुद्र की ऊंची लहरें तटों को तोड़कर आगे बढ़ीं जिससे अनेक मकान नष्ट हो गए।

15-20 मीटर ऊंची लहरें

प्रत्यक्षदर्शियों ने सोशल मीडिया पर सुनामी का मंजर सोशल मीडिया पर बयां किया है। ओयस्टीन एंडरसन ने फेसबुक पर लिखा, ‘तट से गुजरते समय लहरों की ऊंचाई 15 से 20 मीटर थी, जिसकी वजह से हमें तट से भागना पड़ा।’

परिवार सहित जंगल के रास्ते भागा फोटोग्राफर
उसने कहा कि वह ज्वालामुखी की तस्वीरें ले रहा था कि अचानक तेज गति से आती एक बड़ी लहर दिखी। एंडरसन ने लिखा, 'दूसरी लहर एक होटल में घुसी जहां हम रुके हुए थे। मैं परिवार के साथ किसी तरह जंगल और गांव के रास्ते बचने में कामयाब रहा, फिलहाल स्थानीय लोग हमारी देखभाल कर रहे हैं, शुक्र है कि हम सुरक्षित हैं।

गवर्नर के कार्यालय में शरण
सुनामी का सबसे ज्यादा प्रभाव जावा के बांतेन प्रांत के पांडेंगलांग क्षेत्र में पड़ा है। आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक यहां 33 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा दक्षिणी सुमात्रा के बांदर लामपंग शहर में सैकंड़ों लोगों को गवर्नर के कार्यालय में शरण लेनी पड़ी है।



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