#MeToo | अकबर के लिए प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगाएगी भाजपा, इस्तीफा संभव

15 October 2018

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार के विदेश राज्य मंत्री एवं पूर्व पत्रकार एमजे अकबर के लिए पार्टी ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाने के कतई मूड में नहीं है। चुनाव से पहले जिस तरह एक के बाद एक आरोप सामने आए हैं, ऐसी स्थिति में यदि कार्रवाई नहीं हुई तो फायदा सिर्फ अकबर को होगा और नुक्सान पूरी पार्टी को। भाजपा सूत्रों का कहना है कि मंत्री की मीडिया में सफाई आने के बाद पार्टी ने अकबर को तलब कर लिया है। यदि अकबर पार्टी हाईकमान को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए तो उनसे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है। वैसे भी अकबर भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता नहीं हैं। 

अकबर के इस्तीफे से भाजपा को फायदा होगा

पार्टी और सरकार में एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि चूंकि सारे आरोप एमजे अकबर के मंत्री बनने से पहले के हैं, ऐसे में उनके इस्तीफे से पार्टी और सरकार की छवि को कोई नुकसान नहीं पहुंचने वाला है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अकबर ने फिलहाल मीडिया के माध्यम से आरोपों पर सफाई दी है। वह जल्द ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपनी सफाई देंगे। संभवत: इसी दौरान उन्हें स्वेच्छा से इस्तीफा देने का निर्देश दिया जा सकता है। 

बयान के बाद भी अकबर की स्थिति कमजोर

वैसे भी उनसे जुड़े आरोपों का सिलसिला शुरू होते ही शीर्ष नेतृत्व ने उनके भविष्य को ले कर गंभीर मंथन किया था। उस समय तक एमजे की कुर्सी बचती दिख रही थी। तब शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले में इंतजार करने का फैसला किया था। मगर बाद में आरोपों का सिलसिला तेजी से आगे बढ़ा और उनकी स्थिति कमजोर होती चली गई। 

संज्ञान नहीं लिया तो पार्टी को नुक्सान होगा

सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक एमजे पर लगे आरोपों का इस सरकार से कोई लेना देना नहीं है। सारे आरोप उस समय के हैं जब अकबर पत्रकारिता में सक्रिय थे। ऐसे में इन आरोपों से सरकार की छवि पर कोई आंच नहीं आ रही। हालांकि अब वह सरकार में शामिल हैं और आरोपों पर संज्ञान न लेने पर सरकार और पार्टी की छवि पर असर पड़ेगा। संज्ञान न लेने की स्थिति में आरोपों का सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। हालांकि डर इस बात का है कि बिना सबूतों के लगाए जा रहे आरोपों का सिलसिला अकबर की विदाई के बाद भी जारी रहा तो मुश्किलें खड़ी होंगी। 

महिला मंत्री हैं मुखर 

आरोपों पर सरकार में शामिल कई महिला मंत्री मुखर हैं। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने सार्वजनिक तौर पर आरोपों की जांच की सलाह दी है तो दूसरी वरिष्ठ मंत्री स्मृति ईरानी ने मी टू अभियान मामले में महिलाओं के साहस की प्रशंसा की है।
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