चुनावी चक्कर: डेढ़ लाख बिजली चोरों के केस वापस होंगे, बिल भी माफ होंगे | MP NEWS

08 August 2018

भोपाल। एक अदद चुनाव जीतने के लिए सीएम शिवराज सिंह क्या क्या नहीं कर रहे। जनता की मेहनत की कमाई पर वसूले गए टैक्स का करोड़ों रुपए ऐसी योजनाओं पर बहाया जा रहा है जो जनता की अदालत में गंभीर गुनाह है। मप्र के डेढ़ लाख बिजली चोरों के केस वापस लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं उनके बकाया बिल भी माफ किए जा रहे हैं। इनकी बकाया रकम का भुगतान जनता से वसूले गए टैक्स के माध्यम से किया जाएगा। ये वो मामले हैं जो न्यायालयों में पेश किए जा चुके हैं। यानि सरकारी जांच में बिजली चोरी प्रमाणित पाई गई है। क्या यह बिजली चोरी को बढ़ावा देने का मामला नहीं है। 

विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126, 135 व 138 के तहत विशेष न्यायालयों में चलने वाले सभी मामले बिजली कंपनियां वापिस लेंगी। ऊर्जा विभाग ने 30 जुलाई को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इंदौर की पक्षेविवि कंपनी सहित प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों ने इन सभी धाराओं में लगे प्रकरणों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। पड़ताल के मुताबिक इन तीन धाराओं में प्रदेश में डेढ़ लाख मामले विशेष न्यायालयों में चल रहे हैं। इनमें से आधे मामले प्री-लिटिगेशन स्टेज पर हैं। बाकी आधे केस न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन सभी मामलों में उपभोक्ताओं को न्यायालय की तारीख पर हर बार उपस्थित होना पड़ता है। 

यह होता है इन धाराओं में 
बिजली से जुड़े अपराध के संबंध में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126, 135 अौर 138 के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं। धारा 126 में बिजली का अप्राधिकृत उपयोग, 135 में बिजली चोरी और धारा 138 में मीटर से छेड़छाड़ के मामले दर्ज होते हैं। अप्राधिकृत उपयोग और चोरी के मामले में पहली बार पकड़े जाने पर जुर्माना लगाकर छोड़ा जाता है। दूसरी बार पकड़े जाने पर गिरफ्तार कर 6 से 8 गुना जुर्माना लगाया जाता है। वहीं बिजली के मीटर से छेड़छाड़ के मामले में जुर्माने के साथ गिरफ्तारी की जाती है। तीनों धाराओं में संबंधित आरोपी के खिलाफ विशेष न्यायालय में प्रकरण भी चलाया जाता है। इनमें सरचार्ज के साथ चोरी की राशि जमा करने के अलावा तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

ऐसे वापिस होंगे प्रकरण 
विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126, 135 और 138 के मामलों की जानकारी निकाली जाएगी। इसके बाद बिजली कंपनी का विजिलेंस विभाग केस वापिस लेने की कार्रवाई करेगा। बिजली कंपनी ने चोरी या मीटर से छेड़छाड़ के मामलों में जो भी सरचार्ज लगाया है, उसे माफ किया जाएगा। इसके अलावा वसूली की मूल राशि का आधा हिस्सा बिजली कंपनी भरेगी और आधा हिस्सा शासन की तरफ से दिया जाएगा। केस वापिसी की प्रक्रिया के बाद बिजली कंपनी शासन से आधा हिस्सा लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। 

तीनों कंपनियों ने प्रक्रिया शुरू की 
प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां बिजली चोरी संबंधी केस वापिस लेंगी। शासन से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। इस आदेश के आधार पर हमने पूर्व, पश्चिम और मध्य क्षेत्र बिजली कंपनियों को सभी प्रकरणों की वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। संजय कुमार शुक्ला, एमडी मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी 

केस की जानकारी जुटाने के आदेश 
ऊर्जा विभाग ने विद्युत अधिनियम की अलग-अलग धाराओं में केस वापिस लेने के आदेश दिए हैं। हमने सभी सर्कल कार्यालयों को केस संबंधी जानकारी जुटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत यह सभी केस वापस लिए जाएंगे। 
आरजी पाण्डेय, अधीक्षण यंत्री विजिलेंस 
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