सपा, कांग्रेस नहीं, BJP से गठबंधन करेंगी मायावती | NATIONAL NEWS

30 July 2018

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में गठबंधन होने के प्रबल आसार दिख रहे हैं। इससे भाजपा और बसपा दोनों दलों को लाभ होगा। भाजपा नेतृत्व मायावती को उप प्रधानमंत्री की कुर्सी ऑफर कर सकता है। सपा या कांग्रेस के साथ जाने से बसपा को नुकसान का खतरा है, तो भाजपा को केंद्र की सत्ता में वापसी की चुनौती।

यूपी में बसपा को फायदा होगा
उत्तरप्रदेश के कुछ खोजी पत्रकारों का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी और संघ के वरिष्ठ लोग इस मिशन पर लगा दिए गए हैं। भाजपा और संघ के कई बड़े नेता इस पर काम शुरू कर चुके हैं। इस मुद्दे पर मंथन चल रहा है। पिछले दिनों जिस प्रकार से समाजवादी पार्टी के साथ मायावती का व्यवहार देखने को मिला है, वह भी यह साबित करता है कि मायावती समाजवादी पार्टी के साथ आसानी से नहीं जाएंगी। वैसे भी पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा खाली हाथ थी। यदि इस गठबंधन की कवायद पूरी हुई तो यह बसपा के लिए शून्य से शिखर पाने जैसी स्थिति होगी।

मायावती की मजबूरियां उन्हे भाजपा के साथ ले जाएंगी
राजनीति के पंडितों की भविष्यवाणी है कि बसपा सुप्रीमो मायावती की चुनौतियां और मजबूरियां उन्हें सपा और कांग्रेस या अन्य दलों की ओर जाने से रोक रही हैं। यह उनके लिए उतना लाभदायक नहीं है, जितना कि वह अपेक्षा कर रही हैं। यही वजह है कि बीजेपी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि बसपा को उनके साथ समझौता करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। 

बसपा ने कांग्रेस से गठबंधन कर चुनाव कभी नहीं लड़ा
दलितों और मुसलमानों के गठजोड़ को लेकर चलने वाली कांग्रेस से हमेशा बहुजन समाज पार्टी की एक निश्चित दूरी रही है। हालांकि बाहर से वह कांग्रेस नीत यूपीए सरकार को समर्थन देती रही है। बसपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर कभी चुनाव नहीं लड़ा। मायावती को डर है कि उनका दलित वोट बैंक उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर का दलित जो उनके साथ है, कांग्रेस के साथ चला जायेगा।

भाजपा के साथ बसपा को कभी नुक्सान नहीं हुआ
जानकार मानते हैं कि बहुजन समाज पार्टी को अपने तमाम छिपे एजेंडे साधने के लिए सत्ताधारी दल के साथ जाना ज्यादा मुनासिब होगा। कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए बसपा को अब भी उसके सत्ता में वापसी का विश्वास नहीं हो पा रहा है। वैसे भी बहुजन समाज पार्टी जब-जब बीजेपी के साथ आई है, उपलब्धियां ही अर्जित की हैं। बार-बार सत्ता का स्वाद चखने को मिला है। उसे नुकसान कभी नहीं हुआ।

मध्यप्रदेश में तत्काल फायदा होगा
जानकारों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी के साथ आने से भाजपा का सत्ता में पुनः वापसी का रास्ता साफ होगा। वहीं संघ का मिशन हिंदुत्व भी मजबूत होगा। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी लगातार जातीय राजनीति के खिलाफ मोर्चा खोल रखे हैं। इससे जातीय राजनीति टूटती है तो भी हिंदुत्व के एजेंडे पर भाजपा को लाभ मिलेगा। मायावती के साथ आने से भाजपा को उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश भर में लाभ मिलेगा। महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भाजपा के पास दलितों के बड़े चेहरे हैं।

यूपी में सपा से दूर जा रही है बसपा
लोकसभा की दो सीटों फूलपुर और गोरखपुर सीटों पर हुए उपचुनाव में बसपा सुप्रीमो ने खुलकर समाजवादी पार्टी का समर्थन किया था। वह सीटें सत्ताधारी दल भाजपा से छिन गई। इसके बाद कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बसपा ने खुलकर समर्थन नहीं किया। बसपा के खुलकर समर्थन नहीं करने के पीछे का कारण भी माना जा रहा है कि बसपा और भाजपा में कहीं न कहीं गठबंधन की खिचड़ी पक रही है। 

मोदी के साथ आने से दलित भी नाराज नहीं होंगे
जानकार मानते हैं कि मायावती के पास दलित समाज को भाजपा के साथ जुड़ने को तार्किक ढंग से बताने को बहुत कुछ है। मायावती दलित समाज को बताएंगी कि दलित समाज के उत्थान को लेकर बसपा ने जो सोचा था, मोदी उसे आगे बढ़ा रहे हैं। दलित महापुरुषों पर जितना काम मोदी ने किया उतना कोई सरकार नहीं कर पाई।

मोदी ने आंबेडकर को आगे बढ़ाया है
प्रधानमंत्री मोदी भी तमाम आरोपों के बावजूद बसपा के दलित उत्थान वाले मिशन को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। भाजपा आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस ने ऐसे महापुरुषों को पीछे ही रखा है। यह बात मोदी समेत पूरी भाजपा कह रही है। गठबंधन होने की स्थिति में और मायावती भी इसी बात को कहेंगी। मायावती अपने समर्थकों को बताएंगी कि मोदी पिछड़े वर्ग से आते हैं और वह किसी भी जाति वर्ग के महापुरुष को ऊंचा स्थान दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। बसपा को छोड़ यदि किसी दल ने दलित महापुरुषों को सम्मान दिया तो वह भाजपा ही है। मोदी ने अंबेडकर से जुड़े स्थलों को पंचतीर्थ घोषित किया। उस पर काम किया, उसे अमली जामा पहनाया। राज्य की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भी  आंबेडकर की फोटो सभी सरकारी दफ्तरों में रखने की अनिवार्यता कर दी है। यह सब यूं ही नहीं हो रहा। इसके पीछे सोची-समझी रणनीति काम कर रही है।

संघ की ख्वाहिश, एक हो हिंदू समाज
दूसरी तरफ  संघ  चाहता है कि संपूर्ण हिंदू समाज एक हो। दलितों का राजनीतिक रूप से अलग जाना आरएसएस की सोच के विपरीत होगा। संघ की इस मुद्दे पर एकदम स्पष्ट नीति है। उसकी प्राथमिकता सत्ता में आना नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज को जोड़े रखना है। बसपा के साथ आने से भाजपा तो सत्ता में आएगी ही, संघ का भी अपना एजेंडा सध रहा है। ऐसे में सभी को लाभ हो रहा है।
मध्यप्रदेश और देश की प्रमुख खबरें पढ़ने, MOBILE APP DOWNLOAD करने के लिए (यहां क्लिक करेंया फिर प्ले स्टोर में सर्च करें bhopalsamachar.com

और अधिक समाचारों के लिए अगले पेज पर जाएं, दोस्तों के साथ साझा करने नीचे क्लिक करें

-----------

अपनी पसंदीदा श्रेणी के समाचार पढ़ने कृपया नीचे दिए गए श्रेणी के ​बटन पर क्लिक करें

Loading...

Advertisement

Popular News This Week