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AICC जांच में गलत नियुक्ति के दोषी पाए गए कमलनाथ, जिलाध्यक्ष का इस्तीफा

भोपाल। छिंदवाड़ा सांसद कमलनाथ ने राहुल गांधी को विश्वास दिलाया था कि यदि उन्हे कांग्रेस की कमान दी जाती है तो प्रदेश में गुटबाजी खत्म हो जाएगी लेकिन प्रदेश अध्यक्ष बनते ही 'कमलनाथ गुट' पॉवर में आ गया। कमलनाथ ने शहडोल में अपने नजदीकी सुभाष गुप्ता को जिलाध्यक्ष बना दिया परंतु कमलनाथ के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस के सिपाही लामबंद हो गए। मामला दिल्ली तक गया। मप्र के इतिहास में पहली बार किसी नियुक्ति की जांच के लिए दिल्ली की टीम आई और अंतत: कमलनाथ समर्थक सुभाष गुप्ता को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो गुटबाजी की लड़ाई में कमलनाथ हार गए। वो अपना जिलाध्यक्ष भी नहीं बचा पाए। 

कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने 20 जिला अध्यक्षों को बदला था, जिसमें संभागीय जिला शहडोल भी शामिल था। शहडोल में कमलनाथ गुट के सुभाष गुप्ता को जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, लेकिन एक साल पहले 2017 में शहडोल नगर पालिका चुनाव के दौरान कांग्रेस से बगावत करने पर सुभाष गुप्ता को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। प्रदेश कांग्रेस में बदलाव होने के बाद कमलगुट होने के कारण सुभाष गुप्ता को शहडोल कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बना दिया गया। जिसकी शिकायत राहुल गांधी से की गई थी।

AICC की टीम ने बंद कमरे में की जांच

राष्ट्रीय सचिव हर्षवर्धन सपकल 27 मई की शाम शहडोल पहुंचे। यहां सर्किट हाउस में बंद कमरे के भीतर पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर रायशुमारी की। इस दौरान राष्ट्रीय सचिव सपकल ने निजता का पूरा ध्यान रखा और बंद कमरे में कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को चर्चा की। इस दौरान ब्यौहारी ​विधायक रामपाल सिंह भी पहुंचे। बताया जा रहा है कि उन्होंने भी जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर असंतोष जाहिर किया है।

राहुल गांधी को सौंपी गई रिपोर्ट 

मध्यप्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी जिला अध्यक्ष की नियुक्ति पर जांच करने राष्ट्रीय टीम खुद राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर आई हो। महाराष्ट्र से बुल्डाना विधायक हर्षवर्धन ने बंद कमरे में कार्यकर्ताओं से रायशुमारी कर ली है। बताया जा रहा है कि 90 प्रतिशत शिकायतों को सही पाया गया। इसके बाद यह रिपोर्ट राहुल गांधी को सौंप दी गई। 

सुभाष गुप्ता को देना पड़ा इस्तीफा

अंतत: कमलनाथ के प्रिय जिलाध्यक्ष सुभाष गुप्ता को इस्तीफा देना पड़ा। सुभाष गुप्ता ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि वो कांग्रेस को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि यदि उनके पास समय ही नहीं था तो उन्होंने यह पद स्वीकार ही क्यों किया। सुभाष का इस्तीफा कमलनाथ की हार के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह भी प्रमाणित हो गया कि कांग्रसे में गुटबाजी कायम है। 
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