भोपाल, 30 जून 2026: दिनांक 23 जून को जब इंडियन एक्सप्रेस ने डेढ़ पेज की खबर प्रकाशित की तो मीडिया का एक बड़ा वर्ग यह समझने की कोशिश कर रहा था कि इतने सारे डॉक्यूमेंट कलेक्ट करने और एक दूसरे से लिंक करने में कितना समय लगा होगा। वाकई कितनी मेहनत की गई है लेकिन श्री दिग्विजय सिंह के कल के बयान ने स्पष्ट कर दिया कि, कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं हुई। एक भाजपा विधायक डॉक्यूमेंट की फाइल लिए घूम रहा था। उनके पास भी आया था।
भाजपा का विधायक फाइल लिए घूम रहा था
उज्जैन में 500 करोड़ की जमीन ₹1 में ट्रस्ट को देने वाले मामले में, उज्जैन जाकर श्री जीतू पटवारी की कलई खोलने वाले श्री दिग्विजय सिंह ने अपने लेटेस्ट बयान में यह जरूर कहा है कि जीतू पटवारी हमारे नेता हैं लेकिन "दलाल" शब्द के उपयोग पर कुछ नहीं कहा। मतलब अपने बयान पर टिके हुए हैं। इसी दौरान श्री दिग्विजय सिंह ने बताया कि वह और जीतू पटवारी एक सम्मेलन में शामिल होने के लिए "चोरल" गए थे। यहां पर भाजपा का एक विधायक उनसे आकर मिला। श्री दिग्विजय सिंह ने बताया कि यह वही विधायक हैं जिनकी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से नहीं पट रही है। उस विधायक ने पूरी फाइल दी थी।
इंडियन एक्सप्रेस, दो नेताओं की लड़ाई में, एक का हथियार बन गया
इस प्रकार श्री दिग्विजय सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया कि, भाजपा का एक विधायक, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की प्रॉपर्टी से संबंधित फाइल को लेकर विपक्ष के नेताओं के चक्कर लगा रहा था। जब विपक्ष के नेताओं ने उसका "मोहरा" बनना मंजूर नहीं किया, तब यह मामला इंडियन एक्सप्रेस तक पहुंचा और रिपोर्ट प्रकाशित हुई। अजीब बात यह नहीं है कि इंडियन एक्सप्रेस, दो नेताओं की लड़ाई में, एक नेता का हथियार बन गया बल्कि अजीब बात यह है कि इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले को ऐसे प्रेजेंट किया जैसे उनकी खुद की इन्वेस्टीगेशन है। देश की सेवा और लोकतंत्र की रक्षा में अपनी जान पर खेल कर इन्वेस्टिगेशन की है। श्री दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों को वह पूरी फाइल दिखाई, जो विधायक द्वारा दी गई थी।
जब हमने श्री दिग्विजय सिंह के दावे की सत्यता पता करने का प्रयास किया तो पता चला कि वह विधायक विपक्ष के नेताओं से मिलने से पहले भारतीय जनता पार्टी में मुख्यमंत्री पद के दूसरे दावेदारों से जाकर मिला था। शायद उसकी उम्मीद रही होगी कि, मुख्यमंत्री पद के लालच में पार्टी के वरिष्ठ और पावरफुल नेता, उसके हाथों की कठपुतली बन जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तब विधायक ने विपक्ष के नेता श्री दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी का उपयोग करने का प्रयास किया। जब यह चाल भी फेल हो गई तब मामला इंडियन एक्सप्रेस तक पहुंचा। अब केवल इतना पता लगाना बाकी है कि, विधायक और इंडियन एक्सप्रेस का कनेक्शन कैसे हुआ। वह टेबल किसकी थी जिसके इस तरफ विधायक और उस तरफ इंडियन एक्सप्रेस बैठा हुआ था।
कुल मिलाकर, 7 दिन पहले जो ब्लास्ट हुआ था, एक-एक करके उसके पूरे दाग मिटते जा रहे हैं। स्पष्ट हो गया है कि यह दो नेताओं की प्रॉपर्टी की लड़ाई है। भाजपा का एक नेता जो दूसरे जिले में रहता है, उज्जैन में जमीनों का खेल खेल रहा है। इधर की जमीन खरीद कर उधर की जमीन पर कब्जा कर रहा है, और जब पिछले दिनों रजिस्ट्री में टैक्स चोरी और संपत्ति के कब्जे में हेरा फेरी का मामला हाईलाइट हुआ तो बौखला कर अपनी ही पार्टी के दूसरे नेताओं के डॉक्यूमेंट लीक करने लगा। वैसे सुना है उसने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस प्रकार की धमकी भी दी थी।
इस प्रकार स्पष्ट हो गया कि, ऐसा नहीं है की प्रॉपर्टी का यह मामला मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह या मीडिया ने इसलिए नहीं उठाया क्योंकि वह मोहन यादव से डरते हैं, बल्कि इसलिए नहीं उठाया क्योंकि सबको पता है कि यह दो नेताओं की लड़ाई है, और इसमें कोई किसी का "प्यादा" बना नहीं चाहता।
digvijay singh jitu patwari pic.twitter.com/MWfI30Eoee
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) June 30, 2026

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