​भोपाल में फूटा व्यावसायिक प्रशिक्षकों का आक्रोश: पुलिसिया दमन भी नहीं डिगा सका हौसला; कल DPI का महा-घेराव

Updesh Awasthee
​भोपाल, 29 जून 2026:
राजधानी का आंबेडकर पार्क आज उस समय आंदोलन के महासमर में बदल गया जब नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ (NVETA) के आह्वान पर प्रदेश के समस्त जिलों से आए हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) ने अपनी 4-सूत्रीय जायज मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन का शंखनाद कर दिया। आंदोलन के प्रथम दिवस ही 3500 से अधिक प्रशिक्षकों ने महा-आंदोलन में हिस्सा लेकर शासन-प्रशासन को अपनी एकजुटता और शक्ति का अहसास कराया।  

​दमनकारी कार्रवाई भी नहीं डिगा सकी हौसला

​आंदोलन को रोकने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा विभिन्न तरह की वैधानिक व जमीनी कार्रवाई की गई, परंतु अपने हक की लड़ाई लड़ रहे प्रशिक्षकों का हौसला डिगा नहीं पाए। संघ के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि पुलिसिया कार्रवाई के उपरांत भी हमारा यह न्यायोचित आंदोलन पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगा। जब तक सरकार हमारी मांगें पूर्ण नहीं करती, तब तक पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।

​आंदोलन को मिला 'मध्य प्रदेश शिक्षक संघ' का बड़ा समर्थन

​व्यावसायिक प्रशिक्षकों के इस न्यायोचित आंदोलन को शासन द्वारा मान्यता प्राप्त संगठन 'मध्य प्रदेश शिक्षक संघ' का भी बड़ा समर्थन प्राप्त हुआ है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर ने प्रशिक्षकों की लंबित मांगों का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि इन राष्ट्र निर्माताओं का शोषण बंद होना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे शीघ्र ही इन लंबित मांगों के सकारात्मक निराकरण हेतु लोक शिक्षण आयुक्त एवं शिक्षा सचिव से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर शिक्षा शिक्षा मंत्रालय एवं विभाग द्वारा गठित कमेटी के वरिष्ठ सदस्य भी हैं, जिससे इस मध्यस्थता से सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

अब ​कल होगा लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का महा-घेराव

​आंदोलन के पहले दिन के ऐतिहासिक जनसैलाब की सफलता के बाद महासंघ ने अपनी रणनीति और आक्रामक कर दी है। संघ के प्रांतीय नेतृत्व ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि कल (30 जून) प्रातः 10:00 बजे से अपनी मांगों के समर्थन में हजारों की संख्या में व्यावसायिक प्रशिक्षक लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), भोपाल का ऐतिहासिक घेराव करेंगे।

​10 वर्षों से शोषण और अल्प मानदेय के खिलाफ आक्रोश

​महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष जगदीश सिंह परमार ने बताया कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 'समग्र शिक्षा अभियान' के अंतर्गत विगत 10 वर्षों से कार्यरत ये प्रशिक्षक बच्चों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। परंतु, विडंबना देखिए कि जहां दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में इनका वेतन ₹38,600 से अधिक है, वहीं मध्य प्रदेश में इन्हें मात्र ₹20,000 के अत्यंत अल्प मानदेय पर जीने को विवश किया जा रहा है। इनके पास न तो जॉब सुरक्षा है और न ही वैधानिक अवकाश की पात्रता।  

​महासंघ की प्रमुख 4-सूत्रीय न्यायोचित मांगें:

​1. सम्मानजनक वेतनवृद्धि: दिल्ली-हरियाणा की तर्ज पर सम्मानजनक वेतनवृद्धि करते हुए 5% से 10% की वार्षिक वेतनवृद्धि (Increment) लागू की जाए।  
​2. वैधानिक अवकाश नीति: आकस्मिक अवकाश (CL), मेडिकल लीव और महिला प्रशिक्षकों के लिए सवैतनिक मातृत्व अवकाश (Paid Maternity Leave) बहाल हो।  
​3. 12 माह की सेवा व पूर्ण जॉब सुरक्षा: भारत सरकार द्वारा पूरे 12 महीने का बजट मिलने के कारण 12 महीने की सेवाएं सुनिश्चित कर पूर्ण जॉब सुरक्षा दी जाए।  
​4. स्थायी विभागीय कमेटी: व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु एक स्थायी विभागीय कमेटी का गठन हो।  
​आज पूरा भोपाल "सम्मान, सुरक्षा और अधिकार - हमारा अधिकार" तथा "प्रशिक्षक एकता जिंदाबाद" के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। संघ अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आर-पार की लड़ाई के मूड में है। मांग पूर्ण होने तक आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!