ज्ञान विज्ञान न्यूज़ डेस्क, 25 जून 2026: दूसरी दुनिया यानी हमारे सौरमंडल (हमारे सूर्य और उसके समस्त ग्रहों का परिवार) के बाहर से आए देवता की विदाई का समय है। दुनिया भर के हजारों वैज्ञानिक उनको जाते हुए देख रहे हैं। अंतरिक्ष विज्ञान की भाषा में इनको अंतरतारकीय वस्तु (Interstellar Object) कहा जाता है। जिनको अंतरिक्ष विज्ञान का अधूरा ज्ञान होता है वह इनको एलियन का स्पेसशिप कहते हैं। पृथ्वी की कुछ प्राचीन सभ्यताओं में इनको दूसरी दुनिया का मेहमान और प्राचीन भारतीय सभ्यता में इनको ऐसे देवता के रूप में वर्णित किया गया है जो विभिन्न लोकों में विचरण करते हैं, लेकिन कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते।
25 जून को सूचना मिली, 1 जुलाई को दर्शन हुए और 2 जुलाई को कंफर्म हो गया
तो मैं अंतरिक्ष में घट रही इस घटना को भारतीय ज्योतिष और भारत की प्राचीन कथाओं के शब्दों का उपयोग करते हुए, बताऊंगा। सामान्य तौर पर इस प्रकार की चीजों को अंतरिक्ष विज्ञान में धूमकेतु कहा जाता है। दिनांक 1 जुलाई 2025 को Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System (ATLAS टेलिस्कोप) ने किसी असामान्य गतिविधि को रिकॉर्ड किया। उसने बताया कि कोई धूमकेतु तेजी से पृथ्वी की तरफ आ रहा है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन के लिए इस ऑब्जेक्ट को A11pl3Z नाम दिया। इससे पहले जून 2025 में पहली बार वैज्ञानिकों के सामने एक तस्वीर आई थी और पृथ्वी के वैज्ञानिक इसके बारे में कोई अनुमान लगाने की स्थिति में पहुंचे थे। 2 जुलाई को यह कंफर्म हो गया कि, हमारे सौरमंडल में यह चीज जो दिखाई दे रही है, वह हमारे सौरमंडल का हिस्सा नहीं है। हमारे सूर्य का उसे पर कोई असर नहीं पड़ता। हमारे गुरुत्वाकर्षण और किसी भी प्रकार की गतिविधि का उस पर कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए इसको एक नया नाम दिया गया 3I/ATLAS इसमें 3I का मतलब है 3rd Interstellar Object और सबसे पहले ATLAS ने देखा इसलिए 3I/ATLAS. इसका पूरा मतलब हुआ ATLAS द्वारा खोजी गई तीसरी अंतरतारकीय वस्तु। इससे पहले 2017 में 1I/ʻOumuamua और 2019 में 2I/Borisov को देखा गया था।
अब तक के सबसे बड़े और सबसे तेज
हमारे वैज्ञानिकों ने नोट किया कि, 3I/ATLAS की Eccentricity अब तक की सबसे ज्यादा 6.14 और Velocity at infinity (v∞): अब तक की सबसे तेज 58 km/s है। मतलब दूसरी दुनिया से आए देवताओं में यह तीसरी देवता हैं और इनका आकार एवं उनकी गति, अब तक आए दोनों देवताओं से बहुत ज्यादा है। हम इनको देवता इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इन्होंने हमारे सौरमंडल को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।
सूर्य देवता की अनुमति से मूल स्वरूप के दर्शन हुए
29 अक्टूबर 2025 सबसे चमत्कारी दिन था जब दूसरी दुनिया से आई यह देवता हमारे सूर्य के सबसे नजदीक थे। सूर्य की गर्मी के कारण इनका तेज और अधिक बढ़ गया था, यह पहले से कहीं ज्यादा चमकदार हो गए और इसके कारण हमारी पृथ्वी के वैज्ञानिक यह पता लगा पाए कि उनके आसपास का जो आभामंडल (Coma) है वह लगभग 7 किलोमीटर तक फैला हुआ है और उसके अंदर CO₂ गैस है। यह हमारे सौरमंडल में पानी, CO, CO₂, मिथेन, HCN आदि गैसें छोड़ रहे हैं। इनका रंग हल्का लाल है और 15.5–16.2 घंटे की स्पीड से अपनी धुरी पर घूम (Rotation) रहे हैं। H2O के कारण कई बार इनका प्रकाश आसमानी नीला और CO2 के कारण हल्का सुनहरा भी दिखाई देता है।
मंगल, बृहस्पति और पृथ्वी का अध्ययन किया
दिनांक 19 दिसंबर 2025 को यह हमारी पृथ्वी के नजदीक से निकले। सूर्य और पृथ्वी के अलावा यह मंगल और बृहस्पति के नजदीक से भी निकले लेकिन किसी को नुकसान पहुंचाना तो दूर की बात, किसी भी ग्रह के सिस्टम को डिस्टर्ब तक नहीं किया। सब ऐसा लगा जैसे हमारे सोलर सिस्टम के राजा सूर्यदेव से मुलाकात की, अपना परिचय दिया और फिर मंगल, बृहस्पति एवं पृथ्वी का अध्ययन करते हुए चले गए। जाते हुए जो तस्वीर मिल रही है वह बेहद भावुक करने वाली है। अब इनकी स्पीड 60 किलोमीटर प्रति सेकंड है। वैज्ञानिक इन्हें अंतिम क्षण तक देखना चाहते हैं क्योंकि उन्हें मालूम है यह धूमकेतु है, देवता है, मेहमान है या जो भी है, अब कभी वापस नहीं आएंगे।

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