इंदौर, 30 अप्रैल 2026: भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री संतोष वर्मा के फर्जी कोर्ट ऑर्डर मामले में एक नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन के बाद इस मामले के मास्टरमाइंड का खुलासा किया है। वह भी एक जज है। पुलिस का कहना है कि इंदौर के मुख्य न्यायाधीश में स्ट्रीट के चेंबर में सारा षड्यंत्र रचा गया था। तत्कालीन CJM के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इंदौर कोर्ट ने इंदौर के पूर्व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
Santosh Verma IAS Case Takes New Twist: Former Indore CJM Named as Mastermind, Police Reveal
मामला भीम आर्मी का समर्थन प्राप्त अनुसूचित जाति के कर्मचारियों के नेता एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री संतोष वर्मा का है। श्री वर्मा के खिलाफ इंदौर के लसूडिया पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। जिसका चालान इंदौर जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इसी मामले में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज श्री विजेंद्र सिंह रावत ने सन 2021 के जून महीने में एमजी रोड पुलिस थाने में एक आवेदन दिया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि, उनकी कोर्ट से दिनांक 6 अक्टूबर 2020 को एक कूटरचित आर्डर जारी हुआ है। जबकि आदेश उनके द्वारा जारी नहीं किया गया है।
पुलिस इन्वेस्टिगेशन में पाया गया कि यह कूटरचित आदेश में आईएएस अधिकारी श्री संतोष वर्मा को दोष मुक्त घोषित किया गया है। इससे पहले एक और आदेश था जिसमें बताया गया था कि फरियादी महिला और आरोपी संतोष वर्मा के बीच में राजीनामा हो गया है। पुलिस इन्वेस्टिगेशन में पाया गया कि एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज श्री रावत के लिपिक नीतू सिंह चौहान द्वारा कोर्ट के कागज पर कोर्ट की मशीन से फर्जी आदेश टाइप किया गया था। बाद में पुलिस ने इस मामले में शिकायत करने वाले एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज श्री रावत को भी आरोपी बनाया। पुलिस का कहना है कि श्री रावत और संतोष वर्मा ने मिलकर यह आदेश बनाया और नीतू सिंह चौहान ने उनके कहने पर फर्जी आदेश टाइप किया जबकि, नीतू सिंह को मालूम था कि यह गैरकानूनी है।
अब इस मामले में पुलिस ने इंदौर जिले के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री अमन सिंह भूरिया को मुख्य षड्यंत्रकारी के रूप में नामजद किया है। इन्वेस्टिगेशन के बाद पुलिस का कहना है कि श्री भूरिया ने ही अपने चेंबर में श्री संतोष वर्मा और श्री विजेंद्र सिंह रावत की मुलाकात करवाई थी। पुलिस का कहना है की इन्वेस्टीगेशन के दौरान श्री संतोष वर्मा और श्री विजेंद्र रावत दोनों ने अपने बयान में कहा है कि उनकी मुलाकात CJM श्री अमन सिंह भूरिया के चेंबर में हुई थी। पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन के बाद यह खुलासा भी किया है कि श्री भूरिया ने 16 सितंबर 2020 से लेकर 22 जून 2021 तक संतोष वर्मा के साथ 32 बार फोन पर बात की। इसके लिए उन्होंने दो मोबाइल नंबरों का उपयोग किया। यह बातचीत सामान्य तौर पर होने के बाद रात के समय की गई। जिस दिन श्री संतोष वर्मा का केस श्री रावत की कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था उस दिन भी संतोष वर्मा और श्री भूरिया के बीच आठ बार बातचीत हुई थी।
पुलिस को इन्वेस्टिगेशन के बाद जब पर्याप्त एविडेंस मिल गए तो उसने इंदौर के Ex CJM श्री अमन सिंह भूरिया को उनके पक्ष रखने के लिए नोटिस भेज कर बुलाया था लेकिन श्री अमन सिंह पुलिस थाने में उपस्थित नहीं हुए, बल्कि उन्होंने इंदौर जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका लगा दी। न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।

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