भोपाल समाचार, 25 फरवरी 2026 : इसको आप किस तरह की अपराध की श्रेणी में रखेंगे आप खुद तय कीजिए लेकिन एक बात पक्की है कि आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय की मनमानी के कारण मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षकों और सरकार का करोड़ों का नुकसान हुआ है। मजे की बात यह है कि CAG ने अपने ऑडिट में यह तो पकड़ लिया कि नुकसान हुआ है, लेकिन कितना नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी नहीं दे पाए क्योंकि यहां भी आयुक्त लोक शिक्षण की मनमानी चल रही थी और उन्होंने डाटा ही नहीं दिया। इस पूरे मामले का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
CAG Report: CPI’s Arbitrary Decisions Cause Loss of Crores to Lakhs of Teachers
CAG की रिपोर्ट (संख्या 10, वर्ष 2025) में शिक्षक संवर्ग के लिए अंशदायी पेंशन योजना (NPS) के फंड प्रबंधन में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और देरी का खुलासा किया गया है।
मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने मई 2011 में शिक्षक संवर्ग को अंशदायी पेंशन योजना (NPS) में शामिल करने के निर्देश जारी किए थे, जो सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य थी। नियमों के अनुसार, प्रत्येक शिक्षक को अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) का 10 प्रतिशत अंशदान देना होता है, जिसमें सरकार (नियोक्ता) द्वारा भी समान राशि (10 प्रतिशत) का मिलान अंशदान दिया जाता है।
सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDOs) को शिक्षकों से एकत्रित यह राशि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, अरेरा कॉलोनी शाखा, भोपाल में आयुक्त, लोक शिक्षण (DPI) के नाम से खोले गए एक विशेष बचत खाते (संख्या: 451702011009387) में जमा करनी थी। बैंक खाते में प्राप्त इस राशि को अगले महीने की 15 तारीख तक अनिवार्य रूप से नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) को कर्मचारियों के विवरण के साथ स्थानांतरित किया जाना था।
लेखापरीक्षा (2018-23) के दौरान पाई गई कमियां
ऑडिट में यह पाया गया कि आयुक्त, लोक शिक्षण (DPI) ने निर्धारित समय सीमा के भीतर बैंक खाते में प्राप्त पूरी राशि NSDL को हस्तांतरित नहीं की, जिससे कर्मचारियों के निवेश रिटर्न पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उनको NPS का जो लाभ मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। फंड हस्तांतरण में हुई भारी कमी का वर्षवार विवरण इस प्रकार है:
• वित्तीय वर्ष 2018-19: बैंक खाते में कुल ₹2281.89 करोड़ जमा हुए थे, लेकिन NSDL को केवल ₹1762.82 करोड़ ही भेजे गए। इस वर्ष ₹519.07 करोड़ (22.75 प्रतिशत) की राशि हस्तांतरित नहीं की गई।
• वित्तीय वर्ष 2019-20: खाते में ₹2440.82 करोड़ जमा हुए, जिनमें से ₹1884.96 करोड़ स्थानांतरित किए गए। यहाँ ₹555.86 करोड़ (22.77 प्रतिशत) की कमी रही।
• वित्तीय वर्ष 2020-21: कुल ₹1486.98 करोड़ जमा हुए और ₹1125.13 करोड़ भेजे गए। इस वर्ष ₹361.85 करोड़ (24.33 प्रतिशत) की राशि रोकी गई।
• वित्तीय वर्ष 2021-22: जमा राशि ₹617.55 करोड़ थी, जबकि केवल ₹284.40 करोड़ स्थानांतरित हुए। हस्तांतरण में कमी बढ़कर ₹333.15 करोड़ (53.95 प्रतिशत) हो गई।
• वित्तीय वर्ष 2022-23: खाते में ₹500.86 करोड़ आए, लेकिन केवल ₹197.75 करोड़ ही भेजे गए। इस वर्ष सबसे अधिक 60.52 प्रतिशत (₹303.11 करोड़) की कमी दर्ज की गई।
कर्मचारियों और सरकार पर प्रभाव
फंड ट्रांसफर में देरी के कारण शिक्षक उन निवेश लाभों से वंचित रह गए, जो उन्हें समय पर पैसा जमा होने पर मिलते। वित्त विभाग के नवंबर 2013 के निर्देशों के अनुसार, यदि अंशदान समय पर NSDL में जमा नहीं होता है, तो सरकार को विलंब अवधि के लिए निर्धारित दर पर ब्याज देने का दायित्व होता है। इस प्रकार सरकार का नुकसान हुआ और सरकार को, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय की गलती के कारण ब्याज भरना होगा। विभाग के पास महीने-वार अंशदान का विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण, ऑडिट टीम, सरकार पर पड़ने वाले ब्याज के सटीक वित्तीय बोझ का आकलन नहीं कर सकी।
संबंधित उत्तरदायी और सरकार की प्रतिक्रिया
इस बैंक खाते के संचालन और समय पर फंड हस्तांतरण की प्राथमिक जिम्मेदारी आयुक्त, लोक शिक्षण (DPI), भोपाल की थी। फरवरी 2025 की एक्जिट कॉन्फ्रेंस में सरकार ने तर्क दिया कि NPS के कार्यान्वयन चरण के दौरान कुछ परिचालन पहलू स्पष्ट नहीं थे, जिसके कारण विलंब हुआ। सरकार ने यह भी दावा किया कि 31 दिसंबर 2024 तक लंबित शेष राशि को घटाकर ₹246 करोड़ कर दिया गया है।
CAG की कड़ी टिप्पणी:
ऑडिट ने सरकार के इस जवाब को स्वीकार नहीं किया। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि योजना का प्रारंभिक चरण बहुत पहले समाप्त हो चुका है और कर्मचारियों के पैसे को बैंक खाते में रोके रखना पूरी तरह से अनियमित है।
CAG के महत्वपूर्ण सुझाव
CAG ने सिफारिश की है कि सरकार को कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए NSDL खाते में अंशदान के समय पर हस्तांतरण को सुनिश्चित करने हेतु एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करना चाहिए। साथ ही, 'एजुकेशन पोर्टल' के उन मॉड्यूल्स को भी जल्द ठीक करने की सलाह दी गई है जो NPS अंशदान की स्थिति को सही ढंग से नहीं दिखा पा रहे हैं।

