Amazing facts in Hindi- मध्य प्रदेश का एक राजा जो विश्व में सबसे शक्तिशाली था

Bhopal Samachar
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मध्यप्रदेश में एक स्थान ऐसा है जहां का राजा विश्व का सबसे शक्तिशाली राजा था। इसका उल्लेख भारतवर्ष के सबसे प्रमाणिक दस्तावेज महाभारत में भी मिलता है। इस राजा को सहस्त्रबाहु अर्जुन के नाम से जाना जाता है। इनका मूल नाम अर्जुन था। राजा कृतवीर्य के पुत्र होने के कारण इन्हें कार्तवीर्य अर्जुन कहा गया। इसके अलावा इन्हें सहस्रबाहु कार्तवीर्य या सहस्रार्जुन के नाम से भी जाना जाता है। 

मध्य प्रदेश का महेश्वर ही प्राचीन और भव्य नगर माहिष्मती है

मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे एक नगर को सम्राट अर्जुन ने अपनी राजधानी बनाया था। जिसका नाम माहिष्मती था। वर्तमान में इस शहर को महेश्वर के नाम से जाना जाता है। यह इतने शक्तिशाली राजा था कि इन्होंने लंकाधिपति रावण को भी युद्ध में पराजित करके बंदी बना लिया था। इसी कारण इन्हें दशग्रीव जयी कहा गया। सातों महाद्वीपों के राजा होने के कारण इन्हें सप्त द्वीपेश्वर के नाम से पुकारा गया। राजाओं के राजा होने के कारण राजराजेश्वर कहा जाता था। 

राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन की क्या सचमुच 1000 भुजाएं थी

सम्राट अर्जुन के पास  एक हजार अक्षौहिणी सेनाएं थी। हमारा मानना है कि इसीलिए इन्हें सहस्त्रबाहु कहा गया। जबकि एक अन्य कथा में बताया गया है कि भगवान दत्तात्रेय की तपस्या की और उन्होंने वरदान स्वरूप सम्राट अर्जुन को 1000 भुजाओं का बल प्रदान किया। इसलिए सम्राट अर्जुन को सहस्त्रबाहु अर्जुन कहा गया। 

अक्षौहिणी सेना में कितने सैनिक होते थे

अक्षौहिणी, प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था। ये संस्कृत का शब्द है। विभिन्न स्रोतों से इसकी संख्या में कुछ-कुछ अंतर मिलते हैं। महाभारत के अनुसार इसमें 21870 रथ, 21870 हाथी, 65610 घुड़सवार एवं 109350 पैदल सैनिक होते थे।
21870 रथ- प्रत्येक रथ पर एक योद्धा और एक सारथी = 43740 मनुष्य।
21870 हाथी- प्रत्येक हाथी पर एक योद्धा और एक महावत= 43740 मनुष्य। 
65610 घुड़सवार एवं 109350 पैदल सैनिक। 
कुल योग:- 262440 (योद्धा और सैनिक)। 


कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में महेश्वर एक ऐसा स्थान है जो विश्व पर्यटन के नक्शे पर होना चाहिए। सरकार चाहे तो महेश्वर में सहस्त्रबाहु अर्जुन का संग्रहालय। माहिष्मती के भव्य महल की प्रतिकृति और लाइट एंड साउंड शो शुरू कर सकती है। सम्राट अर्जुन की युद्ध कथाएं और अपनी प्रजा के प्रति कर्तव्य निष्ठा, मनुष्यों के प्रति दया भाव और उनकी शासन व्यवस्था निश्चित रूप से आज भी सीखने के योग्य है। 

यदि कोई मल्टीनेशनल कंपनी खड़ी करना चाहता है तो सम्राट अर्जुन की नीतियां उसके लिए बहुत उपयोगी हो सकती हैं।
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