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KAMAL NATH मंत्रिमंडल: देर रात तक चलती रही मीटिंग, संख्या तय, नाम अटके | MP NEWS



नई दिल्ली। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ जिस आसानी से मुख्यमंत्री बन गए, उतनी ही आसानी से उनका मंत्रिमंडल गठित हो जाएगा, इसकी संभावनाएं अब कम हो गईं हैं। कमलनाथ 2 दिन से दिल्ली में हैं। शुक्रवार देर रात तक मीटिंग चलती रही परंतु सहमति नहीं बन पाई। शनिवार को फिर से चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मंत्रिपद के कुछ दावेदार भी दिल्ली पहुंच गए हैं। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ देर रात तक मंत्रिमंडल को लेकर चर्चा करते रहे लेकिन सूची तय नहीं की जा सकी। कमलनाथ गुरुवार को दिल्ली पहुंच गए थे और यहां सांसद सिंधिया से मंत्रीमंडल गठन को लेकर चर्चा की थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक एके एंटनी, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया संभावित नामों की सूची के साथ शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलेंगे और मंत्रिमंडल के बारे में चर्चा करेंगे। राहुल गांधी की सहमति के बाद मंत्रियों को नाम फाइनल होंगे। 

किन बिन्दुओं पर फोकस
सूत्र बताते हैं कि नेताओं के बीच चर्चा में इस बिंदु पर ध्यान दिया गया कि मंत्रिमंडल का आकार छोटा हो यानी 15 से 20 विधायकों को ही शामिल किया जाए। चार निर्दलीय विधायकों में से दो को कहीं और स्थान दिया जाएगा। कमलनाथ दिल्ली रवाना होने से पहले चारों विधायकों से व्यक्तिगत तौर पर बातचीत कर चुके हैं। 

समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) ने बिना शर्त कांग्रेस को समर्थन दिया है। इस बारे में कमलनाथ साफ कर चुके हैं कि अपने विधायकों को मंत्रिमंडल में रखना है या नहीं, इस पर फैसला सपा-बसपा नेतृत्व को लेना है। 

इन क्षेत्रों का होगा सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व
मालवा-निमाड़ क्षेत्र की 66 सीटों में से कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 36 सीटें जीती हैं। 
ग्वालियर-चंबल अंचल की 34 सीटों में से कांग्रेस ने 26 सीटें जीती हैं। 
इसलिए इन इलाकों से नुमाइंदगी को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके बाद महाकौशल, बुंदेलखंड और विंध्य से भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व होगा।