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अब 2014 जैसा अवसर नहीं: NARENDRA MODI की चुनाव रणनीति क्या होगी | NATIONAL NEWS

26 December 2018

नई दिल्ली। 2014 की बात और थी। भाजपा विपक्ष की पार्टी थी। पार्टी नेताओं के पास पर्याप्त समय था। भारतीय जनता पार्टी ने 13 सितंबर 2013 को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को अप्रैल-मई 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया था। मात्र 48 घंटे में उन्होंने रेवाड़ी हरियाणा में पहली रैली की और चुनाव आते आते तक 5000 से ज्यादा कार्यक्रम कर चुके थे परंतु सवाल यह है ​कि अब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं। अब पीएम नरेंद्र मोदी की रणनीति क्या होगी। 

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव की तैयारियां इससे पहले शुरू हो जातीं हैं। अब समय नहीं बचा। आम चुनावों के लिए प्रधानमंत्री मोदी 4 जनवरी 2019 को असम की बराक घाटी में सिलचर से भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट के मुताबिक इस बार भी लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई 2019 तक कराए जाएंगे। लिहाजा अब भाजपा के पास जनवरी से मई तक का समय प्रचार के लिए बचा है। ऐसे में क्या आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री मोदी का वैसा प्रचार कार्यक्रम नहीं तैयार कर रही है जैसा उसने 2014 के चुनावों से पहले किया था।

गौरतलब है कि पूरी दुनिया में 2014 का भारतीय चुनाव एक मिसाल है जब विपक्ष में बैठी पार्टी ने प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर नरेन्द्र मोदी को सामने किया और सितंबर 2013 से मई 2014 तक इस उम्मीदवार के लिए पूरे देश में रैलियां, चुनावी कार्यक्रम, थ्री डी रैलियां और चाय पर चर्चा को मिलाकर कुल 5,827 कार्यक्रम आयोजित किए गए।

2014 चुनाव प्रचार के इन कुल 5,827 कार्यक्रमों में नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी और अमरेली से अरुणाचल प्रदेश तक कुल 437 विशाल जनसभाओं को संबोधित किया। इनमें नरेन्द्र मोदी ने देश के 21 राज्यों में 38 विशाल रैलियां कीं। इनमें सर्वाधिक उत्तर प्रदेश में 8 रैलियां की गईं। वहीं कर्नाटक और बिहार में मोदी ने क्रमश: 4 और 3 रैलियां कीं। गौरतलब है कि इस तूफानी चुनाव प्रचार के साथ नरेन्द्र मोदी ने आम चुनावों से पहले देश के 25 राज्यों का दौरा किया।

2014 के इस तूफानी दौरे की तुलना आगामी चुनावों से करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास अब 4 जनवरी 2019 से लेकर मई 2019 के पहले हफ्ते तक का समय बचा है. इस समय में संसद के सत्र, बजट के विशेष सत्र के अलावा कई ऐसे मौके हैं जब बतौर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रचार के लिए उपलब्धता मुश्किल है. ऐसे में क्या भारतीय जनता पार्टी आगामी चुनावों में प्रचार के लिए प्रधानमंत्री मोदी का इस्तेमाल पूर्व चुनाव की तरह नहीं करने जा रही है?



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