ट्रांसपोर्टर्स के बाद अब मंडी में भी हड़ताल, कांग्रेस और वित्त मंत्री बैठक प्रारंभ की। MP NEWS

27 July 2018

INDORE: ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर पूरे देश में विविध मांगों को लेकर 20 जुलाई से ट्रकों की हड़ताल चल रही है। इससे किराना, आटा, दाल जैसा आवश्यक सामान आना रुक गया है। ट्रांसपोर्टर्स की 20 जुलाई से जारी अनिश्चतकालीन हड़ताल का समर्थन करते हुए मंडियों में अनिश्चतकालीन हड़ताल शुरू हो गई है। शुक्रवार से मंडी में सभी प्रकार के काम बंद कर दिए गए हैं। ट्रकों के नहीं चलने से शहर में हर दिन महाराष्ट्र, दिल्ली, यूपी, गुजरात और दक्षिण से सामान लेकर आने वाले 800 ट्रकों के चक्के थम गए हैं। अब शहर के थोक बाजार में भी अधिक दिनों का माल नहीं बचा है। मंडियों में भी अनाज सड़ने लगा है। ऐसे में जल्द हड़ताल खत्म होना जरूरी है, नहीं तो आवश्यक वस्तुओं की कमी हो जाएगी। मंडी में सड़ते अनाज सहित अन्य समस्याओं को लेकर हड़ताल शुरू हो गई है। वहीं हड़ताल की समाप्ती को लेकर दिल्ली में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और वित्त मंत्री पीयूष गोयल के मध्य बैठक प्रारंभ है। 

शहर में हर दिन 800 से ज्यादा ट्रक तो केवल किराना, पूजा सामग्री व मसाले लेकर आते हैं। किराना सामान महाराष्ट्र, यूपी, दिल्ली की ओर से आता है। सात दिन से ये ट्रक भी बंद हैं। दक्षिण से पूजा सामग्री, मसाला आता है, वह भी पूरी तरह से बंद हो चुका है। शनिवार से सावन मास शुरू होने वाला है। ऐसे में पूजा सामग्री की मांग बढ़ेगी।

अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा ट्रक संचालकों की मांगें वाजिब हैं। हम उनके समर्थन में हैं। आगे भी जरूरत होगी तो हम सभी व्यापारिक संगठनों की बैठक कर साथ देने पर विचार करेंगे, फिलहाल शुक्रवार को बाजार खुले रहेंगे। बाजार पर हड़ताल का असर धीरे-धीरे आने लगा है। गुरुवार को हड़ताल के कारण शहर का थोक बाजार बंद रहा। इसे 27 संगठनों ने समर्थन दिया।

हड़ताल के चलते मंडियों में किसानों का गेहूं, डॉलर चना, मूंग दाल आदि उत्पादन नहीं पहुंच पा रहा है। जो पहुंच गया, वह बिक कर अन्य शहर नहीं जा पा रहा। बारिश के चलते यह अनाज खराब होना शुरू हो गया है। मंडियों में भी हड़ताल की घोषणा होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ट्रकों के कारण जहां का माल वहीं पड़ा हुआ है और सभी सौदे रुके हुए हैं। इंडस्ट्री को कच्चा माल नहीं मिल रहा है। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री मप्र के सचिव योगेश मेहता का कहना है कच्चा माल कुछ दिन और नहीं आया तो उत्पादन ठप हो जाएगा, जिसके चलते उद्योगों के जो माल पहुंचाने के करार हैं, वह टूट जाएंगे। बना हुआ माल भी नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे लागत बढ़ रही है।

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