मप्र में 63851 शिक्षकों के पद खाली हैं, 23 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया: कमलनाथ | MP NEWS

27 July 2018

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने अब शिवराज सिंह सरकार के खिलाफ 'पोल खोलो-वास्तविकता बताओ' अभियान की शुरूआत कर दी है। आज कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में व्याप्त शिक्षा की बदहाल स्थिति को उजागर किया है। कमलनाथ ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी जन आशीर्वाद यात्रा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे कर कांग्रेस को कोस रहे हैं, जबकि वास्तविकता उसके विपरीत है। कमलनाथ ने बताया कि मध्यप्रदेश में मप्र स्टूडेंट्स के अनुपात में 63851 शिक्षकों के पद खाली हैं, खराब शिक्षा प्रणाली के कारण 23 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है। 

23 लाख से अधिक बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया

श्री नाथ ने कहा कि प्रदेश की साढे़ चौदह वर्ष की भाजपा सरकार पिछले छह सालों में शिक्षा में सुधार को लेकर लगभग 48 हजार करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है लेकिन शिक्षा के स्तर को लेकर प्रदेश, देश में निचले पायदान वाले राज्यों में शुमार है। प्रदेश में सरकारी स्कूल में बच्चों का पढ़ना-लिखना तो दूर, उन्हें शब्दों की पहचान भी नहीं है। पिछले पांच सालों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी व खराब शिक्षा प्रणाली के कारण करीब 23 लाख से अधिक बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है।

63851 शिक्षकों के पद खाली पढ़े हैं

प्रदेश में प्राथमिक कक्षा में प्रवेश लेने वाले 23 फीसदी बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। प्रदेश के कुल 01 लाख 14 हजार 719 प्रायमरी व मिडिल स्कूलों में से 97 हजार 211 स्कूलों में बिजली नहीं है, 5606 में बाऊंड्रीवाल नहीं है। यह खुलासा प्रदेश की कैबीनेट बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के मंजूर प्रस्तावों से हुआ है। प्रदेश में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद भी न पढ़ाई का स्तर बढ़ा है और न मूलभूत सुविधाऐं मिली हैं। केग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 18 हजार 213 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे है। 63851 शिक्षकों के पद विद्यार्थियों के अनुपात में खाली पढ़े हैं। 

स्कूलों में खेल मैदान तो दूर शौचालय तक नहीं हैं

करोड़ों खर्च करने के बाद भी राज्य में 10.25 लाख बच्चों ने प्राथमिक स्तर के बाद व 4 लाख 9 हजार बच्चों ने आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी है। प्रदेश के 44 हजार 754 स्कूलों में खेल मैदान नहीं हैं। 5176 स्कूलों में पानी की सुविधा नहीं है। हजारों स्कूलों में छात्र व छात्राओं के अलग-अलग शौचालयों तक की सुविधा नहीं है और दावे बड़े-बड़े किये जा रहे हैं। 
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