मप्र: IAS अफसरों की पदस्थापना आदेश 22 AUG 2017

Tuesday, August 22, 2017

भोपाल। भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी श्रीमती उर्मिला सुरेन्द्र शुक्ला, उप सचिव राजस्व विभाग को संचालक, म.प्र. जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी) पदस्थ किया गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री उमेश कुमार, संचालक एम.पी. स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी को वर्तमान कर्त्तव्यों के साथ-साथ उप सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का दायित्व सौंपा गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस आशय के आदेश जारी किये हैं।

राज्य लोक सेवा अभिकरण अब नये भवन में
भोपाल। लोक सेवा प्रबंधन विभाग के तहत स्थापित राज्य लोक सेवा अभिकरण का कार्यालय अब पुस्तक भवन, अरेरा हिल्स, भोपाल के चतुर्थ तल से संचालित होने लगा है। पहले यह कार्यालय अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भदभदा रोड, भोपाल के भवन में लगता था। उल्लेखनीय है कि नये कार्यालय में अभिकरण के अतिरिक्त मध्यप्रदेश-मेरी सरकार mp.mygov का भी कार्यालय संचालित होगा।

औषधि नियामक पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न  
भोपाल में हुए 'इंटरनेशनल कॉन्क्लेव ऑन बेस्ट प्रेक्टिसेस इन ड्रग रेग्युलेशन'' में हुए दो दिवसीय मंथन के आधार पर राष्ट्रीय खाद्य एवं औषधि नियंत्रण नीति बनाई जायेगी। केन्द्र सरकार द्वारा इसके लिये एक वेबसाइट बनाकर प्रदेश के सभी खाद्य एवं औषधि नियंत्रकों को जोड़ा जायेगा। वे इसमें अपनी समस्याएँ और सुझाव देंगे, जिनके आधार पर नीति में संशोधन होगा। देश के सभी राज्यों में हरेक को गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ वाजिब कीमत पर मिलें, इसके लिये औषधि प्रणाली का ढाँचा और सुदृढ़ किया जायेगा। अपर सचिव केन्द्रीय लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय डॉ. आर.के. वत्स ने भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. जी.एन. सिंह को भोपाल में हुए मंथन के आधार पर रूपरेखा तैयार कर केन्द्रीय शासन के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिये।

संगोष्ठी में आज प्रक्रियाओं के सरलीकरण, पूरे देश में नियमों की एकरूपता, दवाओं का वाजिब दाम, आसान उपलब्धता, विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियामक के क्षेत्र में किये गये नवाचार, अनुभव, मार्गदर्शन, विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक बैंच मार्किंग टूल, भारत में चिकित्सीय उत्पादन नियामक में हाल में किये गये नवाचार, प्रतिनिधि राज्यों द्वारा अपनाई गई उत्कृष्ट प्रणालियाँ, मध्यप्रदेश की गुड रेगुलेटरी प्रेक्टिसेस, आपूर्ति श्रंखला की प्रभावी निगरानी आदि पर विचार-विमर्श हुआ। विभिन्न राज्यों से आये हुए प्रतिनिधियों ने भारत में नियामक प्रणाली मजबूत करने के लिये अपने सुझाव और प्रस्तुतिकरण भी दिये। इसके अलावा सीमावर्ती राज्यों में नियामक क्रियान्वयन, एन्टी माइक्रोबियल रेजीस्टेंस एण्ड इट्स इंटरफेस विद रेगुलेटर्स पर भी मंथन किया गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि भारत में मलेरिया और एन्टीबायोटिक के अनावश्यक उपयोग पर अंकुश लगना चाहिये। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और इनका प्रयोग केवल डॉक्टरी सलाह पर ही किया जाये। इसका जन-सामान्य में व्यापक प्रचार हो। मंथन पर प्राप्त अनुशंसाओं को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपा जायेगा।

संगोष्ठी में भारत सरकार के लोक स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. आर.के. वत्स, सचिव श्री सी.के. मिश्रा, संयुक्त सचिव श्री सुधीर कुमार, श्री सुधांश पंत, प्रदेश की प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) श्रीमती गौरी सिंह, औषधि महानियंत्रक डॉ. जी.एन. सिंह, अध्यक्ष राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी श्री भूपेन्द्र सिंह, भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉ. हेंक बेकेडम, मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य आयुक्त और खाद्य एवं औषधि नियंत्रक डॉ. पल्लवी जैन गोविल सहित देश के अन्य राज्यों के खाद्य एवं औषधि नियंत्रक और औषधि निर्माताओं ने भाग लिया।

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