तलाक के बिना दूसरी शादी को हाईकोर्ट ने रेप माना

Thursday, June 8, 2017

नई दिल्ली। शादीशुदा होते हुए खुद को बैचलर बताकर दूसरी शादी करने वाले शख्स को हाई कोर्ट ने रेप का दोषी करार दिया है। हाई कोर्ट ने पहली शादी रहते हुए दूसरी शादी करने और रेप के जुर्म में आरोपी को 7 साल कैद की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने शारीरिक संबंध बनाने के लिए अपनी सहमति यह सोच कर दी थी कि वह आरोपी की पत्नी है लेकिन वास्तविकता यह थी कि आरोपी पहले से शादीशुदा था। पीड़िता करोल बाग इलाके में दुकान चलाती थी। इसी दौरान आरोपी दुकान में बैंक की किश्त लेने आता था। इसी दौरान दोनों में जान पहचान हुई। आरोपी ने लड़की की मां के सामने प्रस्ताव दिया कि वह उनकी बेटी के साथ शादी करना चाहता है। पुलिस के मुताबिक इसके बाद परिवार वालों की मर्जी से आरोपी ने लड़की से 21 जुलाई 2008 को शादी कर ली। शादी के वक्त आरोपी ने हलफनामा देकर बताया कि वह बैचलर और अविवाहित है। शादी के बाद आरोपी करोलबाग के होटल में लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए। अगले दिन वह पटेल नगर स्थित एक किराए के घर में लड़की को ले गया और वहीं रहने लगा।

लड़की का आरोप
लड़की का आरोप था कि पटेल नगर में रहने के दौरान आरोपी घर लेट से आता था। साथ ही 25 जुलाई को उसके पति ने बताया कि वह बैंक टूर पर जा रहा है ऐसे में 10 अगस्त तक लौटेगा और वह मायके चली जाए। इसके बाद आरोपी वापस आया और बहन के घर राखी पर गया। यही सिलसिला चलता रहा। जब भी घर आता तो संबंध बनाने के बाद गर्भ निरोधक दवा का इस्तेमाल करने को कहता था वह नहीं चाहता था कि बच्चा हो।

बाद में उसने रात को भी आना बंद कर दिया। एक बार जब वह मायके जाने के लिए समान की पैकिंग कर रही थी तो राशन कार्ड की कॉपी देखकर वह दंग रह गई क्योंकि उसमें उसकी पहले से शादी और बच्चे का सबूत मिल गया था। जब पीड़िता ने उससे पहली शादी के बारे में पूछा तो उसने माना कि उसकी शादी हो चुकी है।

पहले पुलिस को शिकायत फिर कोर्ट में
लड़की ने पहले पटेल नगर एसएचओ के सामने इस मामले में शिकायत की और जब केस दर्ज नहीं हुआ तो इलाके के डीसीपी और अन्य आला आधिकारी के सामने शिकायत की। बाद में मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत की और कोर्ट के आदेश पर इस मामले में आरोपी के खिलाफ रेप और पहली शादी रहते हुए दूसरी शादी करने के मामले में केस चला और निचली अदालत ने 7 साल कैद की सजा सुनाई जिसे हाई कोर्ट में आरोपी ने चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट की जस्टिस मुक्ता गुप्ता की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि ये साबित होता है कि आरोपी ने लड़की से 21 जुलाई 2008 को शादी की थी। ये शादी हिंदू रीति रिवाज से हुई थी। आरोपी के पहले शादी के बारे में लड़की को राशन कार्ड की कॉपी से पता चला था। उसने खुद भी स्वीकार किया कि उसकी शादी हो चुकी है। उसने दावा किया कि इस शादी के बारे में पहले से लड़की और उसके परिजनों को पता था।

जब आरोपी ने पीड़िता लड़की से शादी की थी तब उसने हलफनामा दिया था और कहा था कि वह अविवाहित है जबकि वह पहले से शादीशुदा था। शादी के बाद दोनों पति-पत्नी की तरह रहे और पीडि़ता ने खुद को उसकी पत्नी मानते हुए संबंध के लिए सहमति दी। जबकि आरोपी पहले से शादीशुदा था। अदालत ने इस मामले में आरोपी को रेप के मामले में दोषी करार दिया साथ ही पहली शादी रहते हुए दूसरी शादी करने के मामले में भी दोषी करार दिया। निचली अदालत के फैसले में दखल से इनकार करते हुए आरोपी की अर्जी खारिज कर दी।

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