डीमेट परीक्षा: अब हाईकोर्ट को ही जाल में फंसाने की तैयारी

Updesh Awasthee
भोपाल। प्राइवेट कॉलेजों की ऐसोसिएशन APDMC ने डीमेट परीक्षा मामले में अब हाईकोर्ट को ही जाल में फंसाने की तैयारी कर ली है। ऐसे हालात पैदा किए जा रहे हैं कि अंतत: हाईकोर्ट को APDMC के तौर तरीकों से परीक्षा कराने के लिए राजी होना पड़े। याद दिला दें कि डीमेट परीक्षा में पास कराने के लिए 50 लाख से 1 करोड़ रुपए प्रति स्टूडेंट वसूला गया है लेकिन परीक्षा से पहले ही पारदर्शिता के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर हो गई। माफिया का करोड़ों रुपया फंसा हुआ है।

एसोसिएशन में शामिल एक मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर ने बताया कि डीमेट को पारदर्शी तरीके से कराने के लिए कोर्ट को प्रवेश परीक्षा ऑनलाइन कराने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में एग्जामिनेशन एजेंसी का स्तर सही नहीं होने के कारण कोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही नोटिस जारी करके ऑनलाइन एग्जाम कराने वाली नई एजेंसी का नाम सुझाने के निर्देश दिए थे।

इस कारण देश में ऑनलाइन एग्जाम कराने वाली 6 एजेंसियों से चर्चा की थी, लेकिन सभी ने प्रवेश परीक्षा कराने के लिए दो महीने का समय मांगा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की आखिरी तारीख 30 सितंबर तय की हुई है। इस कारण ऑनलाइन एग्जाम कराने की स्थिति में कॉलेजों में जीरो ईयर की स्थिति बन जाएगी। इस संकट से निबटने अब हाईकोर्ट में प्रवेश परीक्षा एजेंसी तय करने का आवेदन एसोसिएशन द्वारा दाखिल किया जाएगा। ताकि एग्जामिनेशन एजेंसी कोर्ट के कहने पर तय समय सीमा में प्रवेश परीक्षा करा सके।

कोर्ट में तय होगा परीक्षा का तरीका
डीमेट ऑनलाइन हो या आॅफलाइन। यह हाईकोर्ट जबलपुर में सुनवाई के दौरान तय होगा। एसोसिएशन ने डीमेट को पारदर्शी तरीके से कराने ऑनलाइन एग्जाम कराने का प्रस्ताव दिया था, जो एग्जामिनेशन एजेंसी के नाम पर कोर्ट की मुहर नहीं लगने के कारण अटका हुआ है। मामले की अगली सुनवाई आगामी 10 अगस्त को होगी। इसमें स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
डॉ. अजय गोयनका, सदस्य, चिरायु मेडिकल कॉलेज

सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हो डीमेट मामला
व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) मामले के व्हिसल ब्लोअर डॉ. आनंद राय ने हाईकोर्ट जबलपुर में डीमेट 2015 की पारदर्शिता के मामले में लगी याचिका सुप्रीम कोर्ट को ट्रांसफर करने आवेदन लगा दिया है। डॉ. राय ने बताया कि निजी मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश परीक्षा डीमेट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार होती है। इस कारण डीमेट 2015 की पारदर्शिता को लेकर लगी याचिका सुप्रीम कोर्ट को ट्रांसफर करने हाईकोर्ट में आवेदन दिया है। 
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