भोपाल, 26 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश की छह बिजली कंपनियों में कार्यरत करीब 45 हजार आउटसोर्स बिजलीकर्मियों ने दीपावली पर 7 और 8 नवंबर को काम बंद आंदोलन की चेतावनी दी है। मध्य प्रदेश बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव और विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन के उपाध्यक्ष नरेंद्र भदौरिया ने कंपनियों को औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 22(1) के तहत नोटिस दिया है।
20 सालों से फेस्टिवल नहीं मिला
संगठन का आरोप है कि कर्मचारियों को पिछले 20 वर्षों से दीपावली और अन्य राष्ट्रीय त्योहारों पर काम करने का अतिरिक्त पारिश्रमिक नहीं मिला। उनकी प्रमुख मांगों में ठेका प्रथा समाप्त करना, नियमितीकरण, न्यूनतम वेतन में सुधार, जोखिम भत्ता, चिकित्सा अवकाश और दुर्घटना में मृत कर्मचारियों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा देना शामिल है।
औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 22(1) क्या होती है
पब्लिक को और खास तौर पर मध्य प्रदेश के अन्य सरकारी कर्मचारियों को यह बात समझना चाहिए कि अचानक हड़ताल पर नहीं जाते। पहले नियम के अनुसार हड़ताल का नोटिस दिया जाता है, जैसे बिजली कर्मचारियों द्वारा दिया गया है। औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (Industrial Disputes Act, 1947) की धारा 22(1) सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं (Public Utility Services) में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा हड़ताल करने पर प्रतिबंधों से संबंधित है। इसके तहत हड़ताल से 14 दिन पहले नोटिस देना होता है। इसके कारण सरकार अथवा कंपनी को सुलह अधिकारी नियुक्त करने का मौका मिलता है। ज्यादातर मामलों में हड़ताल की स्थिति से पहले ही दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाता है।

