भोपाल समाचार, 29 अप्रैल 2026: शिक्षक नेता श्री उपेंद्र कौशल, एक तरफ सरकारी व्यवस्था का फायदा उठा रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार के खिलाफ आंदोलन भड़का रहे हैं। इसके चलते जिला शिक्षा अधिकारी ने उनका अटैचमेंट समाप्त कर दिया है। कर्मचारी नेताओं को इस तरह के जाल में पहले से ही फंसा कर रखा जाता है, ताकि जब कभी कोई ऐसी स्थिति बने तो, लगाम खींची जा सके।
Bhopal: Teacher Leader Upendra Kaushal’s Attachment Cancelled, Seen as Fallout of TET Politics
दरअसल, बात ऐसी है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिना पात्रता परीक्षा के भर्ती हुए शिक्षकों की विशेष पात्रता परीक्षा की तैयारी, सरकार द्वारा की जा रही थी। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कई बार कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है और सुप्रीम कोर्ट ही अपने आदेश पर पुनर्विचार कर सकती है। शिक्षकों के संगठन को सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए लेकिन शिक्षकों के नेताओं ने यह बात नहीं मानी और सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया। बाद जब मुख्यमंत्री तक पहुंची तो डॉक्टर मोहन यादव ने शिक्षकों की सबसे प्रमुख मांग (सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करें) स्वीकार कर ली। इसके बाद भी भोपाल के दशहरा मैदान में शिक्षकों के 13 संगठनों द्वारा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया।
भोपाल में पदस्थ शिक्षक नेता श्री उपेंद्र कौशल, इस पूरे आंदोलन में सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का काम कर रहे थे। दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुई खबरों से तो ऐसा लग रहा था जैसे श्री उपेंद्र कौशल ही पूरे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। जब मुख्यमंत्री द्वारा मांग स्वीकार कर ली गई उसके बाद भी आंदोलन किया गया तो, पुरानी फाइल बाहर निकल गई। जिला शिक्षा अधिकारी श्री एनके अहिरवार ने श्री उपेंद्र कौशल का अटैचमेंट (प्रभारी प्राचार्य, विदिशा रोड स्थित गनियारी हाई स्कूल) समाप्त करके उनका मूल पद स्थापना में वापस जाने के आदेश दे दिए हैं। मतलब श्री उपेंद्र कौशल अब बैरसिया के सोहाया हायर सेकेंडरी स्कूल में एक शिक्षक के तौर पर काम करेंगे। उनको बोर्ड परीक्षा के दूसरे राउंड के लिए स्पेशल क्लास का संचालन करना होगा और जरूरत पड़ने पर जनगणना करने जाना पड़ेगा।
कुल मिलाकर DEO अहिरवार ने श्री उपेंद्र कौशल की नेतागिरी खत्म करके, उनको एक सामान्य कर्मचारी बना दिया है। और स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकारी सुविधाओं का लाभ लेना है तो सरकार को जिंदाबाद कहना होगा।
उपेंद्र कौशल, भोपाल की प्रतिक्रिया
मान्यता प्राप्त संघों द्वारा सत्तापक्ष की आड़ लेकर अधिकारियों पर दबाव बनाना और उसके परिणामस्वरूप अन्य संघ के अध्यापक नेताओं पर कार्यवाही कराना निश्चित रूप से गंभीर और चिंताजनक विषय है। यह स्थिति संगठनात्मक निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
आसंजन समाप्त करना यदि नीति का हिस्सा है, तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। लेकिन यदि मान्यता प्राप्त संघ के सदस्य स्वयं आसंजित बने रहें और अन्य साथियों का विरोध करें, तो यह दोहरे मापदंड को दर्शाता है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।
ऐसी परिस्थितियों में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक है। आवश्यकता है कि सभी निर्णय पारदर्शिता, समानता और नियमों के अनुरूप लिए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात या दबाव की गुंजाइश समाप्त हो सके।
साथियों, हमें संयम और एकजुटता के साथ इस विषय को उठाना चाहिए और न्यायपूर्ण कार्यवाही की मांग करनी चाहिए, जिससे संगठन की गरिमा और साथियों का सम्मान सुरक्षित रह सके। - उपेन्द्र कौशल भोपाल।

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