नई दिल्ली, 23 मार्च 2026 : यह रिपोर्ट दुनिया के शक्तिशाली लोगों में बिना वजह लड़ाई झगड़े के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ वैश्विक बुलियन मार्केट में आई ऐतिहासिक अस्थिरता का विश्लेषण करती है। दुनिया भर में बढ़ते हुए तनाव ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों को धराशायी कर दिया है। USA में बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह की गिरावट, 1983 के बाद अब तक की सबसे ऐतिहासिक गिरावट है। CoinCodex (Gold Forecast Algorithm): अगले 7 दिनों में -6.66% गिरावट की भविष्यवाणी कर दी है।
Gold May Drop 6.66% This Week; Warning of Bigger Global Impact if Crisis Escalates
तनाव की स्थिति बढ़ाने के कारण सोने की कीमतों में 3.8% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह $4,320.30 प्रति औंस के निचले स्तर तक पहुंच गया। वर्तमान मूल्य पिछले वर्ष के समापन स्तर ($4,319.37) से मात्र एक डॉलर ऊपर रह गया है। इसका मतलब हुआ कि पिछले 3 महीने में इन्वेस्टर्स में जो कुछ भी कमाया था वह सब खत्म हो गया। पिछले आठ सत्रों से कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। यह स्थिति शॉर्ट टर्म ने इन्वेस्टर्स को निराश कर रही है और उनको मजबूरी में अपना गोल्ड बचकर बाहर जाना पड़ रहा है।
सोने के लिए संकेत अच्छे नहीं मिल रहे हैं
तेल की कीमतों में उछाल और फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति ने सोने के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न की हैं। शनिवार शाम 7:44 बजे (न्यूयॉर्क समय) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दिए गए अल्टीमेटम ने वैश्विक बाजारों में घबराहट पैदा कर दी है। सिंगापुर के समय अनुसार सुबह 9:00 बजे तक के आंकड़े दर्शाते हैं कि बिकवाली का दबाव केवल सोने तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण कीमती धातु क्षेत्र इसकी चपेट में है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला 'ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स' 0.1% की बढ़त पर रहा, जिसने धातुओं पर दबाव और बढ़ाया।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना काफी कम हो गई है। चूंकि सोना एक 'नॉन-यिल्डिंग' (ब्याज न देने वाली) संपत्ति है, इसलिए उच्च ब्याज दरों का वातावरण निवेशकों को सोने से दूर धकेलता है।
बाजार के तकनीकी संकेतकों से पता चलता है कि वर्तमान में बुलियन मार्केट अत्यधिक दबाव में है। ओवरसोल्ड क्षेत्र (Oversold Zone) सोने का 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 30 के स्तर से नीचे गिर गया है। तकनीकी रूप से यह 'ओवरसोल्ड' स्थिति का संकेत है, जो बाजार में अत्यधिक बिकवाली और घबराहट को दर्शाता है।
Forced Selling
निवेशकों द्वारा अपने पोर्टफोलियो के अन्य हिस्सों (जैसे इक्विटी) में हो रहे घाटे की भरपाई करने के लिए सोने को नकदी में बदला जा रहा है। यह 'जबरन बिकवाली' कीमतों में आई तीव्र गिरावट का एक प्रमुख कारक है।
सट्टेबाजों की जोखिमपूर्ण स्थिति 17 मार्च तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हेज फंड्स और सट्टेबाजों ने अपनी 'Net-long' स्थिति को सात हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया था। भारी मात्रा में इन लॉन्ग पोजीशंस के होने के कारण, कीमतों में गिरावट आते ही 'लॉन्ग-अनवाइंडिंग' शुरू हो गई, जिसने गिरावट को और तेज कर दिया।
विशेषज्ञों के विचार और पूर्वानुमान
वर्तमान तकनीकी ढांचे और भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए बाजार विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है। कैपिटल डॉट कॉम इंक (Capital.com Inc.) के विश्लेषक काइल रोडा कहते हैं कि: "तकनीकी कारणों से सोना अल्पावधि में एक रिकवरी या 'उछाल' (Bounce) के लिए तैयार है। हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि राष्ट्रपति ट्रम्प क्या करते हैं।"
इसके अलावा भी दर्जनों विशेषज्ञों के पूर्वानुमान जारी हुए हैं लेकिन हर किसी ने अंत में एक बार जरूर जोड़ी है, सब कुछ राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कदम पर निर्भर करता है। यदि उनका तापमान कम नहीं हुआ तो सोना पिघलता रहेगा।

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