नई दिल्ली, 8 नवंबर 2025: शासकीय कर्मचारियों की मृत्यु के पश्चात उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था में उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और न्याय स्थापित करने वाला फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि दिवंगत शासकीय कर्मचारी के भाई को भी अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार है लेकिन उसके साथ एक शर्त भी है।
क्या दिवंगत कर्मचारियों के भाई को भी अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है
यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है इसलिए शुरू से शुरू करते हैं। उत्तर प्रदेश की विधिक माप विज्ञान, फैजाबाद रेंज में शासकीय कर्मचारी महेंद्र प्रताप सिंह की दिनांक 9 अक्टूबर 2015 को शासकीय सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इससे पहले 12 फरवरी 2010 को स्वर्गीय महेंद्र प्रताप सिंह की पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी। अब उनके परिवार में शासकीय कर्मचारी का एकमात्र आश्रित उनका छोटा भाई देवेंद्र प्रताप सिंह बचा था। उसने अनुकंपा नियुक्ति के लिए शासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया परंतु उसके आवेदन को स्वीकार कर दिया गया क्योंकि शासन व्यवस्था में दिवंगत कर्मचारियों के भाई को अनुकंपा नियुक्ति का कोई प्रावधान ही नहीं है।
कर्मचारी के भाई को अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
शासन स्तर पर आवेदन एवं अभ्यावेदन निरस्त होने के बाद देवेंद्र प्रताप सिंह ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की। न्यायमूर्ति श्री मनीष माथुर की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह न्याय स्थापित किया कि, याचिका प्रस्तुत करने वाला देवेंद्र प्रताप सिंह, दिवंगत शासकीय कर्मचारी का एकमात्र आश्रित एवं उत्तराधिकार है। वह अविवाहित भी है। दिवंगत कर्मचारियों की पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। इसलिए अब कोई दावेदार अथवा विवाद की स्थिति नहीं है। अतः इस प्रकार दिवंगत कर्मचारी का अविवाहित आश्रित भाई, अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार रखता है।
हाई कोर्ट ने शासन को आदेश दिया है कि दिवंगत शासकीय कर्मचारियों के अविवाहित भाई की अनुकंपा नियुक्ति वाले आवेदन पर 6 सप्ताह के भीतर आदेशानुसार कार्रवाई करके सूचित करें।

