MP NEWS - मुख्यमंत्री ने बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर और ACF को सस्पेंड किया - GAURAV CHAUDHARY IFS

Bhopal Samachar
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मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 10 हाथियों की संदिग्ध मृत्यु के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा भेजे गए विशेष जांच दल ने प्राथमिक रिपोर्ट सबमिट कर दी है। इसके आधार पर मुख्यमंत्री ने बांधवगढ़ नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी को सस्पेंड कर दिया है। सीएम द्वारा उप वनमंडल अधिकारी सहायक वन संरक्षक फतेसिंह निनामा को भी निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि हम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। कोई भी लापरवाह अधिकारी अथवा कर्मचारी बच नहीं पाएगा। हम कड़ी कार्रवाई करेंगे और बांधवगढ़ को हाथियों का नया घर बनाने के लिए सभी इंतजाम करेंगे। दोनों अधिकारियों के निलंबन आदेश इस समाचार में संलग्न है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान सुनिए



बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी निलंबित

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 72 घंटों के भीतर 10 हाथियों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गठित जांच टीम से जानकारी ली। रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में उनको अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बैठक में वन विभाग को मध्य प्रदेश में एलिफेंट टॉस्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए। साथ ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी को निलंबित कर दिया। गौरव चौधरी घटना के पहले छुट्टी पर चले गए थे। इस मामले में जब टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने उनको जानकारी दी तो वे छुट्टी से वापस नहीं लौटे और अपना मोबाइल बंद कर दिया। 

उप वनमंडल अधिकारी सहायक वन संरक्षक फतेसिंह निनामा भी निलंबित

इसके अलावा टाईगर रिजर्व के पनपथा के उप वनमंडल अधिकारी सहायक वन संरक्षक फतेसिंह निनामा को भी निलंबित कर दिया गया। निनामा पर हाथियों की मौत के समय जांच में समय पर सक्षम  नेतृत्व प्रदान नहीं करने तथा अधिकाशं कार्यवाही अधिनस्थों पर छोड़ने के चलते कार्रवाई की गई।  जांच कर लौटे अधिकारियों ने पूरे घटना क्रम की जानकारी मुख्यमंत्री को दी, इसके बाद दोनों अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए गए। 

हाथियों को रात में 11:00 बजे हांका गया था

उमरिया के प्रतिष्ठित पत्रकार संजय कुमार शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दस हाथियों की मौत के बाद जांच करने पहुंची सभी टीम घटनाक्रम के पल-पल का ब्यौरा ले रही थी। जांच टीमों को मिली जानकारी में यह महत्वपूर्ण है कि जंगली हाथियों ने रात में दस से ग्यारह बजे के बीच खेतों में कोदो की फसल को खाया था। जब यहां से उन्हें हांका जाने लगा तो वे पानी पीने के बाद सलखनिया गांव के नजदीक उस स्थान पर पहुंच गए जहां उन्हें बीमार और बेहोशी की हालत में दोपहर तीन बजे गश्तीदल द्वारा देखा गया। जब हाथियों को बीमार हालत में देखा गया तब तक दो हाथियों की मौत भी हो चुकी थी। इस घटना की सूचना मिलने और अधिकारियों के पहुंचने तक दो से तीन घंटे का समय और बीत गया।

बांधवगढ़ में कोई डॉक्टर नहीं थे

घटना की जानकारी मिलने के दौरान बांधवगढ़ में कोई डॉक्टर भी मौजूद नहीं थे। यहां के डॉक्टर नितिन गुप्ता संजय धुबरी में प्रोजेक्टर गौर की मानिटरिंग के लिए गए थे। वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने एनटीसीए से की गई शिकायत में यह जानकारी दी है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आपातकाल स्थिति में सरकारी पशु चिकित्सकों ने मदद करने से इनकार किया जो बेहद गंभीर अपराधिक लापरवाही है और दंड के पात्र हैं। सबसे पहले केवल एक डॉक्टर मधु जैन ही अकेले पहुंची और इलाज शुरू किया। अन्य डॉक्टरों को यहां पहुंचने और फिर उनके अनुमान लगाने के बाद दवाओं के पहुंचने में भी काफी समय लग गया। 

हाथियों की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आना अभी बाकी है

मुख्यमंत्री ने कहा, उमरिया जिले के वन क्षेत्र में हाथियों की मृत्यु की घटना दु:खद है, घटना क्षेत्र में वन राज्य मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों की टीम को भेजा गया था, जिनके द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट दी गई है। हाथियों की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। सीधी, उमरिया जिले व आसपास बड़े पैमाने पर हाथियों के दल की गतिविधियां बढ़ी हैं, ऐसे में अधिकारियों को सजग रहने की जरूरत है। पहले से आ रहे हाथियों के दलों को लेकर लापरवाही बरतने पर फील्ड डायरेक्टर और प्रभारी एससीएफ को सस्पेंड किया गया है। 

हाथी मित्रों का दल बनाने का भी निर्णय लिया है

मध्यप्रदेश में हाथियों के दल के स्थायी प्रबंधन के लिए टास्क फोर्स बनाकर दीर्घकालीन योजना बनाने का निर्णय लिया है, इसमें विशेष प्रबंधन के लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिस को शामिल किया जाएगा। बफर एरिया और मैदानी इलाकों की फसलों को सुरक्षित करने के लिए सोलर फेंसिंग कराने के वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं। हाथी मित्रों का दल बनाने का भी निर्णय लिया गया है।

हाथियों ने मध्यप्रदेश को अपना घर बना लिया है

ऐसी घटनाओं में जनहानि होने पर प्रदेश सरकार ने 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता बढ़ाकर 25 लाख रुपये देने का निर्णय लिया है। हाथियों के हमले की घटना में हुई दो व्यक्तियों की मृत्यु पर प्रदेश सरकार ने पीड़ित परिवारों को 25-25 लाख रुपये देने का निर्णय लिया है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए विशेषज्ञों को भी बुलाया जा रहा है। हाथियों का दल अब स्थायी रूप से मध्यप्रदेश में रहने लगा है, प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि इसके लिए जिला प्रशासन के माध्यम से जागरुकता अभियान भी चलाए जाएंगे। 

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