IPC 210 - बाहरी समझोता करके डिक्री या आदेश को प्राप्त कर लेना कब दण्डनीय अपराध होता है

Bhopal Samachar
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Legal general knowledge and law study notes

जब दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच ध्रुवीसंधि हो जाती है एवं मामला न्यायालय में विचारणीय होता है और समझोते के बाद कोई एक पक्षकार स्वयं को हराने के लिए बहस नहीं करता हैं तो उसके खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 208 के अंतर्गत मामला दायर होता है लेकिन जो व्यक्ति ऐसा आदेश, डिक्री प्राप्त कर लेता है तब उसके खिलाफ भी दंडात्मक कार्यवाही होती है जानिए।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 210 की परिभाषा

जो कोई व्यक्ति न्यायालय के बाहर कपटपूर्ण, बेईमानी करके किसी संपत्ति के लाभ के लिए, राशि के लाभ के लिए कोई आदेश, डिक्री प्राप्त करता है अर्थात भारतीय दण्ड संहिता की धारा 208 के अंतर्गत समझोता या सन्धि करके डिक्री, आदेश प्राप्त करता है वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 210 के अंतर्गत दोषी होगा।

Indian Penal Code, 1860 section 210 Punishment

इस धारा के अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होते हैं इनकी सुनवाई किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है सजा:- इस धारा के अपराध के लिए अधिकतम दो वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 

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