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SDM एवं SDO में क्या अंतर होता है - ASK CRPC

आज हम आपको बहुत महत्वपूर्ण जानकारी देंगे, यह जानकारी आम लोगों के लिए बहुत ही जरूरी है, क्योंकि कभी कभी ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति तहसील में जाकर तहसीलदार को भू-राजस्व संहिता के मामले से संबंधित शिकायत या आवेदन देता है तब वह तहसीलदार से ऊपर के अपीली अधिकारी SDM को समझता है, तहसीलदार SDM के अधीन कार्य कर सकता है, लेकिन भूमि राजस्व संहिता अर्थात भूमि मामले में तहसीलदार का ऊपरी अपीली अधिकारी SDM नहीं होता हैं, SDO (सब डिवीजन ऑफिसर) होता है, जानिए।

1). सब डिवीजन ऑफिसर(SDO) कौन होता है:-

SDO का पावर डिप्टी कलेक्टर रैंक के अधिकारी के पास होता हैं, यह भू-राजस्व संहिता (Lend Revenue Code) की शक्ति का प्रयोग एवं भूमि संबंधित मामलों की सुनवाई करता है। SDO तहसीलदार के अपीली अधिकारी होता है। SDO  मुख्य सिविल अधिकारी भी होते हैं। इन्हें सरकार विभिन्न विभागों में जैसे:- सिविल इंजीनियरिंग, PWD, लोक निर्माण विभाग, डाक विभाग आदि के नियुक्ति कर सकती है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए कुछ जिलों में SDM को ही SDO का प्रभार दिया गया है।

2). सब डिवीजन मजिस्ट्रेट(SDM) कौन होता है:-

SDM भी डिप्टी कलेक्टर रैंक के अधिकारी होते हैं, इनको वही पावर दिए जाते हैं जो एक जिले के DM को दिए जाते हैं। यह विधि व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973(CRPC) के पावर का प्रयोग करते हैं। यह राजस्व निरीक्षक, पटवारियों, तहसीलदारो के प्रमुख होते हैं। इनको विधि व्यवस्था को बनाए रखने के लिए किसी को भी गिरफ्तार करने की शक्ति होती है।इनका प्रमुख कार्य हैं दंगा, बल्वा,अवैध हड़ताल,शोर या लाउडस्पीकर को रोकना आदि होता है।  crpc की धारा 174(4) के अनुसार किसी व्यक्ति की आत्महत्या की जांच SDM स्वयं जाकर कर सकता है।एवं crpc की धारा 133 के अनुसार विधि व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जो आदेश DM या SDM देते हैं वह आदेश अंतिम होता है, उस आदेश की कही कोई अपील नहीं कि जा सकती है।  :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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