कर्मचारी परामर्शदात्री समिति की बैठक नहीं, इसलिए बढ़ रहा है असंतोष

25 June 2018

नरसिंहपुर। मान्यता प्राप्त कर्मचारियों के लिए आयोजित होने वाले विभागीय और जिला स्तरीय संयुक्त परामर्शदात्री समिति की बैठक जिला प्रशासन के उदासीन रवैया के कारण विभागीय कर्मचारियों ने औपचारिकता और खानापूर्ति भर करने के लिए बना रखी है। परामर्शदात्री समिति की बैठक में प्रमुख रूप से जिले में काम कर रहे सभी कर्मचारी संवर्गों के मान्यता प्राप्त संगठन के अध्यक्ष और सचिव सम्मिलित होकर कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं को विभागीय अधिकारियों और जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। जिन पर बैठक में तत्काल प्रभाव से निर्णय लेकर विभागीय अधिकारियों से अमल समय सीमा में करने को कहा जाता हैं। देखने मे आ रहा है कि प्रति तीन माह में अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाने वाली बैठके दो सालों तक नहीं हो रही हैं। जिससे सामान्य तौर पर कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाने में कर्मचारी संघ को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विभागीय स्तर पर रिश्वत और भ्रष्टाचार की गुंजाइश बढ़ जाती हैं। कर्मचारी संवर्गों की छोटी मोटी सेवा संबन्धी कठिनाईयों का निदान होने में दिक्कतें आती हैं।

मप्र शिक्षक संघ नरसिंहपुर जिला सचिव एसपी त्यागी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिलों और प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन जनसुनवाई समाधान एक दिन जनशिकायत प्रणाली पर शिकायतों का बोझ बढ़ जाता हैं। कुछेक कर्मचारी कोर्ट प्रकरण दर्ज कर देते है जिससे न्यायालयीन प्रणाली पर बोझ बढ़ता है शासन और विभाग का समय ऊर्जा और आर्थिक व्यय भी अनावश्यक रूप से बढ़ता जाता हैं। शिक्षा स्वास्थ्य जैसे विभाग की विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में लिये गए निर्णयों को अमलीजामा पहनाने में शिक्षा स्वास्थ्य विभाग  के अधिकारियों की ओर से कोई प्रभावी ढंग से कार्यवाही नहीं की गई हैं।जिससे जिला भर में पदस्थ शिक्षकों और अध्यापको की ओर से  आक्रोश जताया गया है। 

शिक्षकों की जायज विभागीय समस्याओं के निदान की कार्यवाही शुरू नहीं जा रही हैं।वर्षों से शिक्षा संवर्गों की वरिष्ठता सूची जारी करने,24 वर्षीय और 30 वर्षीय क्रमोन्नति सूची जारी करने, जीपीएफ प्रकरणों की स्वीकृति में विलंब ,अध्यापको के संविलियन,6ठवे वेतनमान और महंगाई भत्ते के एरियर्स राशि,सेवा पुस्तिकाओं के स्थानीय लेखा परीक्षक और शिक्षकों की सेवा अभिलेख का कोष लेखा से सत्यापन हेतु, सेवाकालीन और अन्य प्रशिक्षण के मानदेय भुगतान, नियमित वेतन भुगतान इत्यादि दर्जनों समस्याओं के लंबित बने रहने से पूरा शिक्षा विभाग आंदोलित हो रहा हैं। जिले के अन्य विभागों में भी ऐसी ही विकट परिस्थितियों से कर्मचारियों अधिकारियों को दो चार होना पड़ रहा है। मप्र शिक्षक संघ ने कर्मचारियों और शिक्षकों की समस्याओं को सुलझाने संघ के पत्रों और ज्ञापनों पर त्वरित कार्यवाही और सुनवाई की माँग की है।
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