शिवराज ने छोड़ा आडवाणी का साथ, रमन सिंह अपने स्टेंड पर बरकरार

Updesh Awasthee
भोपाल। सत्ता और शक्ति के साथ समर्पण के भाव बदलने में शिवराज एक माहिर खिलाड़ी साबित हो रहे हैं। जो लालकृष्ण आडवाणी कल तक शिवराज सिंह चौहान के लिए पूज्य हुआ करते थे, अब शिवराज उनकी सुध तक नहीं लेते। शिवराज अब मोदीमय हो गए हैं परंतु छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह ने अपनी निष्ठाएं नहीं बदलीं। वो आज भी आडवाणी जी के सम्मान में उसी तरह नतमस्तक होते हैं जैसे कि सीएम बनने से पूर्व हुआ करते थे।
ये है टीम आडवाणी, जिसके लिए आडवाणी ने सबकुछ किया

भाजपा के संस्थापक साथियों में से एक लालकृष्ण आडवाणी के जीवन में बुरे दिनों की कमी नहीं है लेकिन यह वक्त शायद उनके लिए सबसे ज्यादा दुखदायी कहा जा सकता है। यह वो वक्त है जब लालकृष्ण आडवाणी का एक सपना पूरा हो गया है, उनके द्वारा तैयार किए गए कार्यकर्ता देश के प्रमुख पदों पर हैं, परंतु दुखद यह है कि जिनके लिए वो लड़ते रहे, उन्हीं ने उनका साथ छोड़ दिया है।

सभी जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी के लिए तो आडवाणी, अटलजी के सामने भी अड़ गए थे। यदि आडवाणी ना होते तो मोदी को गुजरात दंगों के बाद सीएम सीट से इस्तीफा देना पड़ता। पीएम अटलजी यही चाहते थे, लेकिन अंत क्या हुआ सब जानते हैं।

शिवराज सिंह चौहान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कोई नहीं कह सकता था कि विदिशा के सांसद शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश का सीएम बना दिया जाएगा परंतु बना दिया गया। आडवाणी जी ने यह सुझाव दिया था। यह सही है कि शिवराज सिंह ने अच्छी योजनाएं चलाईं, परंतु यदि आडवाणी का आशीर्वाद ना होता तो क्या शिवराज को यह मौका मिल पाता। आडवाणी ने तो शिवराज सिंह का नाम पीएम केंडिडेट के लिए भी चलाया। व्यक्तिगत तौर पर राजनीति में यह एक बड़ा अहसान माना जाता है परंतु अब क्या।

मोदी की लहर चली, शिवराज ने इस लहर से संघर्ष भी किया परंतु जैसे ही पूरी भाजपा मोदीमय हुई, शिवराज भी शरणागत हो गए। भाग भाग कर दिल्ली पहुंचे और मोदी से अपने संबंध सुधार लिए। यह एक अच्छी रणनीति हो सकती है परंतु उस व्यक्ति को भुला देना जिसने तुम्हे खड़ा किया है, उचित नहीं कहा जा सकता।

मोदी के शक्तिशाली होने के बावजूद छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह ने आडवाणी जी की पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम धूमधाम से कराया और इसी अवसर पर रमन सिंह व शिवराज की बफादारी का तुलनात्मक अध्ययन भी कर लिया गया। चर्चाएं तो चर्चाएं हैं जो शिवराज को अवसरवादी करार दे रहीं हैं।

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