अंतत: सीनियर आईएएस राजीव कुमार को जेल जाना ही पड़ा

Updesh Awasthee
नईदिल्ली। सीनियर आईएएस राजीव कुमार ने जेल से बचने के लिए करीब सवा तीन साल तक तमाम हथकंडे अपनाए, मगर बच नहीं पाए। आखिरकार उन्हें जेल जाना पड़ा। 20 नवंबर 2012 को सजा मिलने के बाद उसी दिन जमानत अर्जी डाली, तीन साल सजा होने के कारण सीबीआई कोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई।

इसके बाद सजा के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज की तो उन पर फिर सरेंडर की तलवार लटक गई। इससे बचने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट चले गए, जहां से उन्हें गिरफ्तारी पर चार हफ्तों की मोहलत ही मिल पाई, जिसकी मियाद 25 अप्रैल को खत्म हो रही थी।

जेल जाने से पहले राजीव कुमार करीब 10 मिनट कोर्ट के कटघरे में खड़े रहे, उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं। उन्हें डासना जेल के मुलाहिजा बैरक नंबर सात में रखा गया है, जहां 35 बंदी और हैं। जेल सूत्रों का कहना है कि उन्होंने शाम का खाना नहीं खाया।

क्या था पूरा मामला
नोएडा एंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 1971 बैच की आईएएस और यूपी की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव पर भूखंड आवंटित करने में अनियमितताएं बरतने के आरोप की जांच की थी और एक रिपार्ट दर्ज की थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री से नीरा के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति ली गई थी। सीबीआई ने कोर्ट में दो अलग-अलग चार्जशीट भी दाखिल की थी, जिसमें एक चार्जशीट नोएडा प्राधिकरण की पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी नीरा यादव व मेरठ के मंडलायुक्त रहे राजीव कुमार को देकर उन्हें आरोपी बनाया गया था। 

पहली चार्जशीट में राजीव कुमार पर यह आरोप लगाया गया था नोएडा अथारिटी में डिप्टी सीईओ पद पर रहते हुए सीईओ नीरा यादव के सहयोग से सेक्टर-51 में 450 वर्ग मीटर का एक भूखंड आवंटित कराया था, जो बाद में सेक्टर-44 ए में परिवर्तित कर दिया गया। उसके बाद बेहद महंगे सेक्टर-14 ए में इसे परिवर्तित करा दिया गया और उसका साइज 300 वर्ग मीटर कर दिया गया। भूखंड के पास में 105 वर्ग मीटर खाली पड़ी हरित पट्टी को भी भूखंड में शामिल कर लिया गया।

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