RAMNIK POWER PLANT के कारण गांव के सारे कुएं सूख गए: ये कैसा औद्योगिकीकरण

Monday, July 10, 2017

आनंद ताम्रकार/बालाघाट। जिले के तहसील मुख्यालय वारासिवनी से 3 किलोमीटर दूर चंदन नदी के किनारे बसे ग्राम खण्डवा के ग्रामवासी इन दिनों पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं ग्राम में स्थित लगभग 18 कुओं का जल स्तर अपनी सतह तक पहुच गया है जिसमें नाम मात्र का पानी दिखाई देता है। ऐसे हालात ग्राम के समीप रमणीक पॉवर प्लांट द्वारा चंदन नदी में बनाये गये 15 कुओं से पाईप लगाकर प्लांट के लिये आवश्यक पानी के दोहन किये जाने से पैदा हो गये है। प्लांट द्वारा प्लांट से निकला दूषित अपशिष्ट पदार्थ भी पाईप के जरिये नदी में बहाया जा रहा है।

यह सिलसिला प्लांट की स्थापना से ही चल रहा है जिसकी वजह से आसपास के गांव का जल स्तर अपनी अंतिम अवस्था तक पहुच गया है प्राकृतिक रूप से जल धारायें जो भूमि गत रूप प्रभावित होती है उसमें अवरोध पैदा हो गया है। जिसके कारण जल संकट दिखाई देने लगा है। इसका असर केवल कुओं और पेयजल तक ही सीमित नही है आसपास की वनस्पतियां और पेड पौधे भी सूखते जा रहे है फसलो पर भी पानी की कमी का दुष्प्रभाव दिखाई दे रहा है।

वैनगंगा सिंचाई विभाग ने प्लांट में नदी से पानी उपयोग अनुमति दी हुई है लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी ने मौके पे पहुचकर यह नही देखा प्लांट द्वारा किस प्रकार से नदी से पानी का दोहन किया जा रहा है और पानी के दोहन किये जाने से सामान्य जन जीवन पर उसका क्या असर हो रहा है।

भोपाल समाचार में इस संबंध में समाचार प्रकाशित किया गया था जिस पर कार्यपालन यंत्री श्री विनोदिया ने कहा था की वे अधिकारियों का दल भेजकर मौके का मुआयना करवायेंगे लेकिन आज तक कोई नही पहुंचा। औधोगिकरण के नाम पर प्राकृतिक जल स्त्रोतों से इस प्रकार मनमाने तरिके से जल का उपयोग और आसपास की आबादी जैविक सम्पदा और पर्यावरण के साथ इस तरह खिलवाड किये जाने से भविष्य में किसी बडी त्रासदी से सामना करना पड सकता है।जिसका प्रशासन के पास तत्काल कोई समाधान नही रहेगा।

ग्राम पंचायत खण्डवा के उपसरपंच मनोज सहारे ने बताया की गांव में कुओ का जल स्तर प्लांट की स्थापना किये जाने के बाद से घटता जा रहा है अब ऐसी हालत  हो गई है कि पानी कुअें की तली तक पहुच गया हैै बमुश्किल 2-3 बल्टी पानी निकलता है वह भी गंदा व मटमेला और दुर्गध युक्त रहता है जिसका पिया नही जा सकता है। गांव में लोग हेंडपंप से पानी की आवश्यकता पूरी करते है।

प्लांट के कारण केवल जल संकट ही नही प्लांट से निकलने वाले धुएं और राख हवा के माध्यम से फैलती हुई कपडों पर गिरती रहती है शुद्ध हवा भी नही मिल रही है। यह उल्लेखनीय है कि रमणिक पॉवर प्लांट में धान के भूसे से बिजली बनाई जा रही है और मैगनीज के परिसोधन का कार्य निरंतर किया जा रहा है जिसके कारण आसपास का वातावरण दुषित हो गया है। इन विसंगतियों को दूर कर प्लांट की वजह से ग्रामीणों को हो रहे पेयजल संकट और जैविक संपदा पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से जिला प्रशासन को इस दिशा में त्वरित कार्यवाही करनी होगी।

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