मालदीव मामले में चीन ने बेवजह मोदी को धमकाया | WORLD NEWS

Tuesday, February 13, 2018

नई दिल्ली। मालदीव संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित रुख का अनुमान लगाकर चीन ने भारत को अग्रिम धमकी दी है। अभी तक इस मामले में भारत ने आधिकारिक तौर पर सिर्फ 'चिंता' जाहिर की है, लेकिन चीन बेचैन हो उठा है। शायद उसका अनुमान है कि पीएम मोदी मालदीव मामले में चुप नहीं रहेंगे। शायद इसीलिए चीन ने भारत को अग्रिम धमकी दे दी है कि अगर भारत वहां सैन्य हस्तक्षेप करता है तो चीन उसे रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगा। जाहिर है, चीन का इशारा सैन्य कार्रवाई की तरफ है। 

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में संपादकीय के जरिए यह बात कही गई है। गौरतलब है कि मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने कहा था कि भारत को 1988 जैसा कदम दोहराते हुए मालदीव में सैन्य दखल देना चाहिए। हालांकि भारत ने इसे लेकर अब तक कुछ नहीं कहा है। माले में अनधिकृत सैन्य हस्तक्षेप रोका जाना चाहिए' शीर्षक से लिखे गए संपादकीय में कहा गया है, 'माले में तनावपूर्ण स्थिति देखते हुए भारत को संयम बरतना चाहिए। मालदीव इस समय संकट से जूझ रहा है। यह देश का आंतरिक मामला है और चीन किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करता है। इतना ही नहीं, अगर भारत वहां सैन्य हस्तक्षेप करता है तो उसको रोकने के लिए चीन को जरूरी कदम उठाने चाहिए।' 

संपादकीय में आगे लिखा गया है कि कुछ भारतीय मालदीव में सैन्य हस्तक्षेप की वकालत कर रहे हैं, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मानकों के हिसाब से सही नहीं है, जिसके तहत सभी देश एक दूसरे की संप्रभुता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का सम्मान करते हैं। अगर मालदीव में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका हल अंतरराष्ट्रीय मेकनिज़म्स के जरिए निकाला जाना चाहिए। एकतरफा सैन्य हस्तक्षेप ने पहले से ही वैश्विक व्यवस्था को बिगाड़ रखा है।' 

अखबार ने नवंबर, 1988 में मालदीव में हुए विद्रोह का भी जिक्र किया है। संपादकीय में आगे लिखा गया, '1988 में सरकार विरोधी कुछ लोगों ने श्रीलंका से आए हथियारबंद किराए के सैनिकों की मदद से सरकार का तख्तापलट करने की कोशिश की थी। भारत ने मालवीद के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल गयूम की गुजारिश पर 1600 सैनिकों का दस्ता भेजा और हालात को काबू किया। कुछ लोग कहते हैं कि भारत ने मालदीव की सरकार को बचाया, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि इस ऑपरेशन के जरिए भारत को अपना प्रभाव जमाने की कोशिश की।' 

भारत पर हमला बोलते हुए संपादकीय कहता है, 'सुरक्षा के लिए मालदीव की भारत पर निर्भरता ने भारत को घमंडी बना दिया है और भारत मालदीव को अपने प्रभाव में लाना चाहता है। लेकिन माले अब दिल्ली से परेशान हो चुका है, जो हमेशा मालदीव की राजनीति में अपना दबदबा बनाने की कोशिश करता है। सुरक्षा के लिए मालदीव की भारत पर निर्भरता ने भारत को अक्खड़ बना दिया है और मालदीव को अपने प्रभाव में लना चाहता है। लेकिन माले दिल्ली से परेशान है, जो हमेशा मालदीव की राजनीति को दबाने की कोशिश कर रहा है।' अखबार ने आरोप लगाया है कि मालदीव का झुकाव अब चीन, अमेरिका, सऊदी अरब और पाकिस्तान की तरफ है इसलिए भारत चिढ़ रहा है। यही वजह है कि भारत वहां सैन्य हस्तक्षेप का बहाना तलाश रहा है। 

आखिर में अखबार ने यह भी लिखा है कि चीन, मालदीव के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा, लेकिन अगर भारत सिद्धांत के खिलाफ जाता है तो वह चुप भी नहीं बैठेगा। अखबार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि सैन्य हस्तक्षेप रोकने की चीन की ताकत को भारत कम न आंके। 

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