मोहन भागवत का बयान हर भारतीय नागरिक का अपमान: राहुल गांधी | NATIONAL NEWS

Monday, February 12, 2018

नई दिल्‍ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के सेना वाले बयान पर बवाल मच गया है। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने इसे हर भारतीय का अपमान बताया है, क्‍योंकि यह उन लोगों का अपमान है जिन्‍होंने हमारे देश के लिए अपनी जान न्‍योछावर कर दी।  यह देश के झंडे का भी अपमान है, क्योंकि तिरंगे को सलाम करने वाले सैनिकों का अपमान किया गया है। उन्‍होंने यह भी कहा कि हमारे शहीदों और सेना का अपमान करने के लिए मोहन भागवत को शर्म आनी चाहिए। रविवार को मोहन भागवत ने कहा था कि उनके स्वयंसेवक देश की रक्षा के लिए तैयार हैं और अगर देश को जरूरत पड़ी और संविधान इजाजत दे तो वे तीन दिन में ही सेना के रूप में मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार हो जाएंगे।  

मोहन भागवत बिहार के मुजफ्फरपुर के जिला स्कूल मैदान में आयोजित स्वयंसेवकों के खुले सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। भारत-चीन युद्ध का हवाला देते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि सिक्किम सीमा क्षेत्र में तेजपुर में पुलिस थाने से सिपाहियों का पलायन हो गया था। उस समय सीमा पर सेना के जवानों के आने तक संघ के स्वयंसेवक डटे रहे थे। स्वयंसेवकों ने नागरिकों का हौसला बंधाया, ताकि लोग वहां से भागे नहीं। स्वयंसेवकों को जब भी जो जिम्मेदारी मिली, उन्होंने पूरी तत्परता से उसका निर्वाह किया।

संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि संघ की शाखा में नौजवानों को खेलकूद, शारीरिक प्रशिक्षण से लेकर अपनी मातृभूमि के लिए समर्पित होने का संस्कार मिलता है। भारतीय जीवन मूल्यों की समझ बढ़ती है। समाज को संस्कारित करने के लिए नियमित रूप से शाखा जाने की जरूरत है।

मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक समरसता का माहौल सिर्फ बातों से नहीं बल्कि, व्यवहार से पैदा होगा। तमाम नेता चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे करते हैं। जनता भी उन दावों की हकीकत समझती है और जनता की बेबाक टिप्पणी भी सुनने को मिलती है। ऐसे में स्वयंसेवकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने आचरण से वो कर दिखाएं, जिससे सामाजिक समरसता का वातावरण बने।

अब बयान पर संघ की सफाई सामने आई
मोहन भागवत के बयान पर बवाल मचता देख आरएसएस की सफाई सामने आई है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी आलोचना हो रही है। ऐसे में आरएसएस की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि मोहन भागवत सेना की तुलना आरएसएस से नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि सेना अपने जवानों को तैयार करने में छह महीने का समय लेती है। अगर आरएसएस प्रशिक्षण दे तो सैनिक तीन दिन में स्वयंसेवक भी बन सकते हैं।

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