सरकारी योजनायें और बचत के सवाल | EDITORIAL

Thursday, February 15, 2018

राकेश दुबे@प्रतिदिन। सरकार अपनी तरफ से भविष्य निधि के रूप में चल रही पब्लिक प्राविडेंट फंड में जो नित नये संशोधनों के मसौदे प्रस्तुत कर रही है, उससे समाधान की जगह भ्रम फैल रहा है और अफवाहों को पर लग रहे है। कुछ दिन पहले ऐसी अफवाहें थीं कि पब्लिक प्रावीडेंट फंड जैसी बचत योजनाओं पर कर छूट बंद होने वाली है। सरकार ने ऐसी अफवाहों पर रोक लगा दी है अपनी तरफ से स्पष्टीकरण देकर, कुछ छोटी बचत योजनाओं को लेकर भी कुछ घोषणाएं भी की हैं। जैसे पब्लिक प्रावीडेंट फंड योजना में यह छूट मिलने जा रही है, कि पांच साल से पहले भी इस खाते को बंद कराया जा सकेगा। अभी पब्लिक प्रावीडेंट फंड के खातों को पांच सालों से पहले बंद नहीं कराया जा सकता। इसका फौरी लाभ उपभोक्ता को नहीं सरकार को ही मिलेगा।

छोटी बचत योजनाओं में पोस्ट ऑफिस बचत खाता, नेशनल सेविंग्स मंथली इनकम, नेशनल सेविंग्स आवर्ती जमा, सुकन्या समृद्धि खाता और पब्लिक प्रावीडेंट फंड शामिल है। सरकार ने यह साफ किया है कि इन योजनाओं को मिल रही कोई भी छूट खत्म नहीं होगी, बल्कि उन्हें बढ़ाया जाएगा। छोटी बचत के खाते अवयस्क के नाम पर भी खोले जा सकेंगे। ऐसे स्पष्टीकरण स्वागत योग्य है।

भारत जैसे देश में वित्तीय मामलों की नींव में भरोसा होता है। ये सारी बचत योजनाएं सरकार से सम्बन्ध रखती हैं। समय-समय पर इस तरह की अफवाहें आती रहती हैं कि सरकारी बैंकों के जमा खातों में जमा रकम का इस्तेमाल सरकारी बैंकों को डूबत खातों की भरपाई के लिए किया जाएगा। या सरकार पब्लिक प्रावीडेंट फंड को मिलनेवाली कर छूट को खत्म करने जा रही है। इस तरह की अफवाहों को अगर समय रहते ना खंडित किया जाए, तो उनसे बहुत नुकसान होने की संभावना होती है। पब्लिक प्रावीडेंट फंड में पांच साल से पहले खाता बंद करने की सुविधा एक ओर तो बचतकर्ता को एक सहूलियत देती है, पर यहां यह भी विचारणीय है कि क्या इस तरह की सुविधा से सामाजिक सुरक्षा की स्थितियां सुदृढ़ होंगी या कमजोर होगी?ऐसा देखने में आता है कि मध्यम वर्ग कर बचाने के चक्कर में कुछ बचत ऐसी करता है, जिसे जबरदस्ती की बचत या जबरन करायी बचत भी कहा जा सकता है, पर एक दिन यह बचत सामाजिक सुरक्षा के माध्यम के तौर पर सामने आती है। सुविधा देना बहुत अच्छी बात है  पर यह ना हो जाए कि बचतकर्ता अपनी सामाजिक सुरक्षा का हर रास्ता अवरुद्ध कर ले। इसके लिए जरूरी है कि वित्तीय साक्षरता का व्यापक प्रचार-प्रसार हो. बचतकर्ता को पता हो कि उसके हित कहां सुरक्षित हैं?
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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