यहां पेयजल के लिए पैसा नहीं, वहां शिलान्यासों की बाढ़ | MP NEWS

Monday, January 8, 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के 2 चेहरे ​देखिए। पहला मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृहजिला सीहोर। जिसकी बुधनी विधानसभा से वो विधायक हैं और नसरुल्लागंज क्षेत्र ने उन्हे सबसे ज्यादा वोट दिए हैं। यहीं पर पेजयल संकट छाया हुआ है। सरकार के पास जल परियोजनाओं के लिए पैसा नहीं है, 260 करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी कर चल रही है। अब दूसरा चेहरा देखिए, अशोकनगर जिले की विधानसभा सीट मुंगावली और शिवपुरी की कोलारस। यहां सरकार के मंत्री करोड़ों की योजनाएं ऊपर वाली जेब में लेकर घूम रहे हैं। शिलान्यासों के पत्थर बनाने का काम तो परमानेंट दे दिया गया है। हर मोड़ पर एक नया शिलान्यास नजर आ रहा है। 

क्या हालात हैं शिवराज सिंह के प्रिय शहर नसरुल्लागंज के
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के गृह जिले सीहोर (नसरुल्लागंज) के साथ पेयजल सप्लाई करने की दस बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए नगरीय विकास विभाग सरकारी बांड के जरिए कर्ज लेने जा रहा है। यह मुख्यमंत्री शहरी जल परियोजनाओं से जुड़ी है, जिस पर चुनाव से पहले 163 करोड़ रुपए खर्च होना है। इसके लिए 260 करोड़ रुपए (शासकीय बांड) की गारंटी सरकार देगी। दस प्रोजेक्ट के अलावा भी शहरी पेयजल की योजनाओं पर चुनावी साल में भी पैसा खर्च होना है। यानी कुल राशि 350 करोड़ से ज्यादा चुनावी साल समेत अगले तीन साल में व्यय होंगे। लिहाजा बांड के अलावा राज्य सरकार सौ करोड़ का अनुदान भी देगी। साफ है कि भाजपा सरकार जानती है कि यदि पेयजल की स्कीमें चुनाव से पहले पूरी नहीं की गईं तो यह विपक्षी दल के लिए मुद्दा बन जाएगा। 

प्रदेश के 51 जिलों के शहरी इलाकों में संचालित पेयजल स्कीमों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार पहले ही एक हजार और 500 करोड़ रुपए करके 1500 करोड़ रुपए की गारंटी दे चुकी है। यह दायरा विभाग पार कर चुका है। उल्लेखनीय है कि 50 हजार तक की जनसंख्या और 50 हजार से अधिक जनसंख्या वाले निकायों में यह काम होना है। 

शिवराज का ऐलान पैसे की कमी नहीं आने दूंगा
हाल ही में सीएम शिवराज सिंह ने मुंगावली और कोलारस में सरकारी सभाओं को संबोधित करते हुए ऐलान किया है कि वो दोनों शहरों को मध्यप्रदेश का सबसे अच्छा शहर बना देंगे। यहां दुनिया की सारी सुविधाएं होंगी। इन क्षेत्रों के विकास के लिए पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी। सवाल यह है कि जब खजाने में कुछ बचा ही नहीं तो पैसों की बात कैसे हो रही है। 

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