सिंधिया के प्रत्याशी सूतक काल में पर्चा दाखिल करेंगे | MP BY-ELECTION NEWS

Tuesday, January 30, 2018

भोपाल। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के खास समर्थक नेता ब्रजेन्द्र सिंह यादव को मुंगावली एवं महेन्द्र सिंह यादव को कोलारस विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित किया गया है। प्रदेश कांग्रेस की ओर से जानकारी दी गई है कि दोनों प्रत्याशी 31 जनवरी 2018 को नामांकन दाखिल करेंगे। संयोग देखिए कि 31 जनवरी को जब दोनों प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर रहे होंगे, चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल चल रहा होगा। सामान्यत: चुनावों में प्रत्याशी शुभ मुहूर्त देखकर ही पर्चा दाखिल करते हैं। पंडित श्रीमद डोंगौर के अनुसार चंद्रग्रहण के राशिफल की बात करें तो मुंगावली प्रत्याशी ब्रजेन्द्र सिंह की राशि वृषभ है, जिनके लिए यह शुभ है। कोलारस प्रत्याशी महेन्द्र सिंह यादव की राशि सिंह है। चंद्रग्रहण इस राशि के लिए अशुभ बताया गया है। चंद्रग्रहण का राशिफल ग्रहण के बाद 30 दिन तक प्रभावी होता है। 

31 जनवरी को कब है सूतक काल
31 जनवरी बुधवार को सूतक काल सुबह 07 बजकर 07 मिनट पर शुरू होकर रात 08 बजकर 41 मिनट पर खत्म हो जाएगा। मंदिर के कपाट सुबह सिर्फ सवा पांच बजे से 8.15 तक ही खुले रहेंगे। यह ग्रहण कुछ लोगों के लिए शुभ तो कुछ लोगों के लिए अशुभ साबित होगा। इसके अलावा इस चंद्र ग्रहण के दिन ही 176 साल बाद पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन चांद आम दिनों के मुकाबले बड़ा दिखाई देगा।

सूतक काल में क्या-क्या करना चाहिए?
सूतक के समय तथा ग्रहण के समय दान तथा जापादि का महत्व माना गया है। पवित्र नदियों अथवा तालाबों में स्नान किया जाता है। मंत्र जाप किया जाता है तथा इस समय में मंत्र सिद्धि का भी महत्व है. तीर्थ स्नान, हवन तथा ध्यानादि शुभ काम इस समय में किए जाने पर शुभ तथा कल्याणकारी सिद्ध होते हैं। धर्म-कर्म से जुड़े लोगों को अपनी राशि अनुसार अथवा किसी योग्य ब्राह्मण के परामर्श से दान की जाने वाली वस्तुओं को इकठ्ठा कर के रख लेना चाहिए और फिर अगले दिन सुबह सूर्योदय के समय दुबारा स्नान कर संकल्प के साथ उन वस्तुओं को योग्य व्यक्ति को दे देना चाहिए। 

सूतक काल में वो कौन से ऐसे काम है जो नहीं करने चाहिए?
सूतक के दौरान और ग्रहण के वक्त भगवान की मूर्ति को स्पर्श करना निषिद्ध माना गया है। इसलिए सूतक काल में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन वर्जित होता है। खाना-पीना, सोना, नाखून काटना, भोजन बनाना, तेल लगाना आदि कार्य भी इस समय वर्जित होते हैं। इस समय झूठ बोलना, छल-कपट, बेकार का वार्तालाप और मूत्र विसर्जन से परहेज करना चाहिए। सूतक काल में बच्चे, बूढ़े, गर्भावस्था स्त्री आदि को उचित भोजन लेने में मनाही नहीं होती और ये सभी इस नियम से बाहर होते हैं यानी उनपर ये नियम लागू नहीं होते हैं।

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