भाजपा ने DON की मां को बनाया प्रत्याशी, डरपोक कांग्रेस पीछे हट गई | MP NEWS

Monday, January 8, 2018

भोपाल। सेंधवा नगरपालिका में अध्यक्ष समेत 10 पार्षदों के जिस निर्विरोध निर्वाचन पर भाजपा गर्व कर रही है, वह शर्म की बात है। भाजपा, कांग्रेस और चुनाव आयोग तीनों के लिए। यहां निर्वाचन प्रक्रिया को ही बंधक बना लिया गया था। कोर्ट में जज के सामने हत्या करने वाला आरोपी फरार चल रहा है। भाजपा ने उसकी मां को नगरपालिका अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया। डरी हुई कांग्रेस ने अपने कदम पीछे खींच लिए। एक अदद शिकायत तक नहीं की। लोकतंत्र बंधक बना लिया गया और सबकुछ जानते हुए भी निर्वाचन अधिकारियों ने निष्पक्ष निर्वाचन की कोशिश ही नहीं की। 

कौन है सेंधवा का डॉन
संजय यादव नाम का बदमाश सेंधवा का डॉन कहा जाता है। इसके खिलाफ 40 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए परंतु पुलिस किसी भी मामले में संजय के खिलाफ गवाह, सबूत पेश नहीं कर पाई। कई मामलों में संजय बरी हो गया। जब आपराधिक रिकॉर्ड बढ़ रहा था तब संजय यादव कांग्रेस का पार्षद हुआ करता था। फिर उसने कोर्ट के अंदर जज के सामने एक व्यक्ति की हत्या कर दी और खूंखार हत्यारा हथियार लहराते हुए सबके सामने से फरार हो गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने बड़ी ही शान से उसे भाजपा में ज्वाइन कराया और उसकी मां को नगरपालिका अध्यक्ष पद का टिकट दिया। 

क्या हुआ था कोर्ट में 
सेंधवा एडीजे कोर्ट में पेशी के दौरान 12 अक्टूबर 2017 को गोपाल कैलाशचंद्र जोशी को एक युवक ने जज के सामने पीठ पर गोली मार दी थी। गोपाल को इंदौर जेल से पेशी पर लाया गया था। उस पर वर्ष 2008 में संजय झंवर की हत्या का मुकदमा चल रहा है। झंवर और संजय यादव पुराने साथी रहे हैं। कोर्ट गोलीकांड में यादव धारा 120-बी का आरोपी है। इस घटना के बाद से संजय फरारी पर है, लेकिन वह फेसबुक पर यादव फेन्स क्लब में सक्रिय है। 

फरार हत्यारोपी को BJP ने शान से ज्वाइन कराया
जिला कोर्ट में हुए गोलीकांड में फरार चल रहे सेंधवा के हिस्ट्रीशीटर संजय यादव को दस माह पहले भाजपा में शामिल किया गया था। कांग्रेस से पार्षद रह चुके संजय को प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने 20 फरवरी को सदस्यता दिलाई थी। संजय के अलावा पिता विष्णु प्रसाद यादव और भाई जितेंद्र यादव ने भी सदस्यता ली थी। उस दौरान वहां सांसद सुभाष पटेल और मंत्री अंतर सिंह आर्य भी मौजूद थे। चौहान ने कहा था कि यादव परिवार के पार्टी में आने से भाजपा मजबूत होगी। 

फरार हत्यारोपी की मां को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया
सेंधवा नगर पालिका अध्यक्ष पद का उम्मीदवार उसकी मां बसंती यादव को बनाया गया। नामांकन भरने की आखिरी तारीख 6 जनवरी थी। नगर पालिका चुनाव के वोट 17 जनवरी को पड़ना है, भाजपा के 24 में से 11 पार्षदों का भी निर्विरोध जीतना तय माना जा रहा है। अध्यक्ष पद के लिए 7 उम्मीदवार मैदान में थे। एक-एक कर 6 उम्मीदवारों ने पर्चा वापस ले लिया।

डरपोक कांग्रेस पीछे हट गई
कांग्रेस देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दम भरती है लेकिन सेंधवा में एक फरार बदमाश के सामने डर गई। जब भाजपा ने डॉन की मां को टिकट दिया तब कांग्रेस ने कोई आपत्ति नहीं उठाई। कांग्रेस के उम्मीदवारों ने पर्चा वापस लिया लेकिन कांग्रेस ने कोई आपत्ति नहीं उठाइ। चुनाव आयोग से कोई शिकायत नहीं की। बात बात पर भाजपा का विरोध करने वाली कांग्रेस के किसी भी दिग्गज ने एक ट्वीट तक नहीं किया। जिलाध्यक्ष सुखलाल परमार कहते हैं कि हमने 2 नेताओं को टिकट दिया लेकिन दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया। इस मामले में जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक सब पर प्रश्नचिन्ह लगता है। जो कांग्रेस एक फरार बदमाश से मुकाबला नहीं कर पाई वो प्रदेश की जनता को न्याय दिलाने के लिए क्या संघर्ष कर पाएगी। 

TI के रिकॉर्ड में फरार है संजय यादव 
कोर्ट गोलीकांड में संजय यादव हत्या के षड़यंत्र में आरोपी है। उसे फरार घोषित किया है। सत्तार की हत्या में भी वह आरोपी है। उसके खिलाफ 40 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं। हालांकि इनमें से कई में वह बरी हो चुका है। संजय निगरानीशुदा बदमाशों की लिस्ट में शामिल है। 
जगदीश पाटीदार, टीआई, सेंधवा थाना 

भाजपा को गर्व है
कांग्रेस प्रत्याशियों को धमकाया गया तो प्रशासन को शिकायत करना थी। संजय यादव को प्रदेशाध्यक्ष ने भाजपा में शामिल कराया था। उस समय हमें केस की जानकारी नहीं थी। हम कोई चरित्र प्रमाण पत्र तो लेते नहीं है। उम्मीदवारों ने स्वेच्छा से नाम वापस लिए है। कांग्रेस कमजोर हो गई तो ऐसी बातें कर रही है। 
ओम खंडेलवाल, जिला अध्यक्ष, भाजपा 

निर्वाचन आयोग भी निर्दोष नहीं
किसी भी क्षेत्र में निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। यदि हालात ऐसे हैं कि किसी बदमाश की दहशत के कारण चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होती है तो उन हालातों को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी भी चुनाव आयोग की ही है। जब तक माहौल शांत ना हो जाए, चुनाव निष्पक्ष ​सम्पन्न होंगे, इस बात की तस्दीक ना हो जाए चुनाव प्रक्रिया शुरू करना एक षडयंत्र ही माना जाना चाहिए। चुनाव आयोग को सुनिश्चित करना चाहिए था कि भाजपा प्रत्याशी का फरार बेटा गिरफ्तार किया जाए उसी के बाद चुनाव हों। यदि रेल की तरह तारीखों की पटरियों पर चुनाव आयोग चला तो निष्पक्ष चुनाव की मूल जिम्मेदारी कैसे निभा पाएगा। 

दहशत तो पूरे परिवार की है
सेंधवा में संजय और यादव परिवार की काफी दहशत है। संजय के खिलाफ गोपाल कैलाशचंद्र जोशी के चचेरे भाई नितिन जोशी की हत्या के षड़यंत्र का केस दर्ज हो चुका है। इसी पुरानी रंजिश के चलते कोर्ट में गोलीकांड हुआ है। संजय के खिलाफ 1984 से अब तक 40 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें हत्या, हत्या के षड़यंत्र, जान से मारने की धमकी, अपहरण के मामले शामिल हैं। संजय के खिलाफ वर्तमान में तीन मामले चल रहे हैं। सत्तार हत्याकांड में भी वह आरोपी है। दो हत्याओं के आरोपियों पर प्राणघातक हमले के केस में संजय यादव फरार है। 

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