हमारा किसी पार्टी या नेता से संबंध नहीं, हम किसी के विरोधी नहीं: जयस | MP NEWS

Monday, December 4, 2017

भोपाल। मध्यप्रदेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच सुर्खियों में आए आदिवासी संगठन 'जयस' के संदर्भ में रविराज बघेल rbveer994@gmail.com ने जयस का पक्ष प्रस्तुत किया है। 
इंदौर जयस के अध्यक्ष श्री रविराज बघेल ने बताया कि विगत कई दिनों से जयस को लेकर तरह-तरह के बयान बाजी तथाकथित राजनीतिक महत्वकांक्षीयो के द्वारा किया जा रहा है। नकारात्मक बयान बाजी का "जयस कोर कमेटी" मध्यप्रदेश घोर निंदा के साथ विरोध दर्ज करता है। क्योंकि कई लोग जयस को समझने कि भूल कर रहे है। वे जयस को किसी राजनीतिक पार्टी से जोड़कर देख रहे है, बहुत से लोग जयस को ईसाई शब्द से जोड़कर संबोधित कर रहे है।

हम किसी पार्टी के संबंधी नहीं, सरकार के विरोधी भी नहीं
श्री बघेल का कहना है कि जयस का किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई सम्बन्ध या ताल्लुक नही है, राजनीतिक पार्टियो एवम् सरकार का भी जयस विरोधी नही है, जयस का वर्क संवैधानिक दायरे के अंतर्गत होता है। जयस सही मुद्दों पर डंके की चोट पर लिखता और बोलता है। किसी भी धर्म का जयस विरोधी नही है। सभी धार्मिक आस्थाओ का जयस सह्रदय से सम्मान करता है, क्योंकि जयस धर्मपूर्वी संस्कृति का पालन करने वाले समाज के संतानो कि स्वतंत्र विचारधारा है। 

कहां से शुरू हुआ जयस 
जयस विचारधारा का उदगम निमाड़, खानदेश और मालवा की सरजमी पर शहीद भीमा नायक और टंटिया मामा की कर्मभूमि में *16 मई 2013* को कृषि ऊपज मंडी जिला बड़वानी मध्यप्रदेश में हुआ है। जैसे जैसे चुनावी मंजर आगामी महीनो में आने वाला है, इसलिए विरोधी एवम् अवसरवादी विचारधाराओ के द्वारा जयस को लेकर बेहूदा सोच सामने आ रही है। जयस को किसी नेता से जोड़कर देखा जा रहा है, ये खबरें सरासर भ्रमित करने वाली है। ऐसी विषैली खबरों से जयस युवाओ को बचना होगा। 

झाबुआ के किसी नेता से संबंध नहीं 
जयस विचारधारा आज हर युवाओ के दिलो में निडरता एवम् समाज प्रेम का माहौल बना रही है। ये जयस का स्वालम्बन है। जयस इतना कमजोर नही है की किसी नेताओ के सामने हाथ फैलाये। जयस का संचालन को लेकर जिनका भी जिक्र किया जा रहा है, उन लोगो का जयस में कोई योगदान नही है, न ही जयस का संचालन जिला झाबुआ से होता है। ये भ्रमपूर्ण प्रचार प्रसार जयस के बढ़ते कद को रोकने के लिये किया जा रहा है। जहाँ पर समाज की सटीक विचारधारा होती है, जयस का संचालन भी वहीं से शुरू हो जाता है, इस प्रकार से देश के हर जर्रे-जर्रे से जयस का संचालन माना जाता है।

सभी अपना अपना खर्चा उठाते हैं
जयस कि सभाओ एवम् रैलियों में समाज के शुभचिंतक अपने स्वयं के खर्चे से आते और जाते है। जयस में कोई व्यक्ती विशेष का फैसला नही चलता है, लोकतंत्रिक फेसलों के अनुसार जयस अपने रास्ते पर बिंदास अग्रसर है। वर्तमान में तथाकथित विचारधाराएँ के राजनीतिक महत्वकांक्षी जयस नाम को जपकर लूप लाइन के दायरे से बहार प्रसिद्दि कि स्टेपनी पाने के फिराक में बिना सोचे समझे प्रिंट मीडिया की खबरों में सुर्खिया हासिल करना चाहते है लेकिन ईक्सवी सदी की नई युवा पीढ़ी विरोधी माइंड तर्क को भलीभाँति जानती है।

कार्यक्षेत्र:-
1. जयस युवा देश के संविधान पर ज्यादा भरोसा करते है, इसलिये सम्पूर्ण आदिवासी समाज में संवैधानिक अधिकारो के प्रति जन चेतना का संचारण कर रहे है।
2. आदिवासियत शिक्षाओ का महत्व दे रहे है।
3. प्रर्यावरण सुरक्षा के लिये वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रहे है। जयस के कार्यक्रमो में आर्टिफिशल गुलदस्ते को बिलकुल भी  महत्व नही दिया जाता है। जयस हकीकत में विश्वास करता है, इसलिए जयस कार्यक्रमो में समाज के शुभचिंतको को छोटे छोटे पौधे वितरित करते है। जिसमे सम्पूर्ण जीवनप्रणाली का हित जुड़ा है।
3. इतिहास,संस्कृति, परम्पराओं एवम् रीतिरिवाज को बढ़ावा जयस दे रहा है।
4. समाज के शहीद क्रान्तिकारियो के बारे में जानकारियां नई पीढ़ियों को उलब्ध करवाता है।
5. जयस समाज के पढेलिखे युवाओ का वैचारिक संगठन है, जिससे हर वर्ग जुड़ा है, आदिवासी समाज के अतिरिक्त अन्य समाज भी जयस विचारधाराओ का आदर करता है।
6. जयस सटीक मुद्दों पर सवाल भी खड़े करता है।
7. विधान सभाओ और संसद में समाज के मुद्दे उठाने वाले नेतृत्व पर जयस का विश्लेषात्मक नजरे रहती है।
8. देश कि शीर्ष संस्थाओ में समाज का नेतृत्व नादारत सा है, इसलिये जयस नव नेतृत्व के सांचे तैयार कर रहा है।
9. समाज के NRI साथियो तक जयस विचारधाओ को पहुचना जयस कि प्राथमिकता है।
10. समाज विरोधी हर तथाकथित विचारधाओ का जयस डंके की चोट पर विरोध भी करेगा ।
11. सरकारी योजनाओ के सही क्रियान्वयन के लिये युवाओ को जानकारियां देना।
12. समाज का पढ़ालिखा वर्ग अधिकतर समाज कि विचारधाओ से दूर आखिर क्यों जा रहा है ? इसके पीछे कौन सा कारण जयस जानना और समझना चाहता है।
13. आदिवासी समाज विकास के नाम पर करोडो पलायन/ विस्थापन का डंक झेल रहा है।
14. समाज में बुनियादी हको के प्रति जन चेतना का संचारण करना।
15. देश के सुप्रीम कोर्ट के निर्णयो का जयस आदर के साथ स्वीकार करता है।

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