मोदी राज: घाटे में गई सरकारी कंपनी, 1800 अधिकारियों को निकालने की तैयारी | national busness news

Thursday, December 21, 2017

नई दिल्ली। भारत में जहां कोयला खनन करने वाली प्राइवेट कंपनियां मोटा मुनाफा कमा रहीं हैं भारत सरकार की कंपनी कोल इण्डिया लिमिटेड (COAL INDIA LIMITED) घाटे में जा रही है। 1975 में स्थापित हुई यह कंपनी दशकों से सरकार को मोटी कमाई देती रही। इसी तरह की कंपनियों के कारण सरकार की आय बढ़ी और जनता पर TAX का बोझ कम हुआ लेकिन अब यह सरकारी कंपनी घाटे में जा रही है। इस कंपनी की स्थापना तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी और मनमोहन सिंह सरकार के समय तक यह फायदा देती रही। नरेंद्र मोदी सरकार में आने के बाद इसके घाटे में जाने की रिपोर्ट आ गई है। हालात यह हैं कि सरकारी कंपनी का प्रबंधन अपने 1800 अधिकारियों को नौकरी से निकालने की तैयारी कर रहा है। 

भारत सरकार कोयला मंत्रालय ने कंडक्ट एंड डिसिप्लिन एपील रूल के जिन्न को 27 साल बाद बोतल से बाहर निकाल लिया है। इसके तहत कोल इंडिया बड़ी कार्रवाई करने जा रही है और साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड (एसईसीएल) बिलासपुर के 1801 अधिकारियों को घर बैठाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। कोल इंडिया के इस फरमान के बाद ई-1 से ई-8 ग्रेड के एक्जीक्यूटिव अफसरों के बीच हड़कम्प मचा हुआ है।

CPSE की रेटिंग में खुली पोल
हाल ही में सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (सीपीएसई) द्वारा पब्लिक सेक्टर में काम कर रहे भारत सरकार के उपक्रमों का रिपोर्ट कार्ड जारी किया गया, जिसमें कोल इंडिया को फेयर ग्रेड मिला। यह पुअर परफॉर्मेंस से सिर्फ एक ग्रेड ऊपर होता है। सीपीएसई से मिली इस रेटिंग के बाद कोल मंत्रालय नींद से जागा और कंडक्ट एंड डिसिप्लिन एपील रूल को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया।

मज़बूरी में लागू करनी पड़ी योजना
कंडक्ट एंड डिसिप्लिन एपील रूल को 1990 में ही बना दिया गया था जिसे कोल इंडिया में लागू नहीं किया जा रहा था क्योंकि इस रूल के लागू होने के बाद लापरवाह अफसरों को प्री मेच्योर रिटायरमेंट देने का प्रावधान है। सीपीएसई ने बताया कि कोल इंडिया का खर्च ज्यादा और आमदनी कम। इस कारण केंद्र सरकार को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कोल इंडिया में 3.5 लाख से ज्यादा का मेन पावर है जिनकी पगार और अन्य सुविधाओं को देने में ही अरबों रुपये खर्च हो रहे हैं। जबकि इन सभी खर्च को पूरा करने के लिए लक्ष्य के अनुरूप कोयला उत्पादन नहीं हो पा रहा है।

50 से 55 वर्ष के अधिकारी बैठेंगे घर
इस योजना के तहत अब कोल इंडिया के 50 से 55 वर्ष के उन सभी अधिकारियों को प्री मेच्योर रिटायरमेंट दी जा रही है जो ई-1 से लेकर ई-8 ग्रेड की मोटी सैलरी बिना आवश्यक काम के ले रहे हैं। इनमें अंडर मैनेजर, जूनियर इंजीनियर, वेलफेयर ऑफिसर्स, इंजीनियर, फायनेंस ऑफिसर्स, असिस्टेंट मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, सीनियर मैनेजर, चीफ मैनेजर, जनरल मैनेजर समेत सभी विभागों के एक्जीक्यूटिव अधिकारियों को शामिल किया गया है।

एरिया स्तर पर तैयार हो रही कुंडली
कोल इंडिया का यह फरमान एसईसीएल बिलासपुर होते हुए एरिया स्तर तक पहुंच गया है। जहां ऐसे अफसरों की कुंडली तैयार की जा रही है जिन पर प्री मेच्योर रिटायरमेंट की कार्रवाई की जाएगी। पहले चरण में एरिया के जीएम कुंडली तैयार करेंगे फिर अंतिम सूची एसईसीएल के सीएमडी तैयार कर कोल इंडिया को कार्रवाई के लिए भेज देंगे। बताया जा रहा है कई जगह तो खुद एरिया के जीएम भी कार्रवाई की जद में हैं।

यह होगा घर बैठाने का पैमाना
- अधिकारी की उम्र 50 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए
- उन्हें सर्विस के दौरान कितनी चार्ज सीट मिली
- उनके क्रिमिनल्स और कोर्ट केस की स्थिति
- बीते 5 साल का उनका वर्क परफॉर्मेंस
- उनके द्वारा लिए गए अवकाशों की स्थिति
- कोल इंडिया के प्रति उनका पर्सनल परफार्मेंस
- अधिकारी का पर्सनल रिकार्ड
- विजलेंस में शिकायत की स्थिति
इस प्रकार के जितने भी दागी अफसर होंगे उन्हें प्री मेच्योर रिटायर कर दिया जाएगा।

हेड क्वार्टर में सबसे ज्यादा सफेद हाथी
जिन लापरवाह और कामचोर अफसरों को घर बैठाने की तैयारी कोल इंडिया ने की है, उसमें सबसे ज्यादा हेड क्वार्टर बिलासपुर के ही अफसरों के नाम शामिल हैं। सीएमडी ऑफिस बिलासपुर में पदस्थ 288 अफसरों पर प्री मेच्योर रिटायरमेंट की तलवार लटकी हुई है।

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