नोटबंदी की रात कालाधन से गोल्ड खरीदने वालों तक नहीं पहुंच पाई मोदी सरकार | NATIONAL NEWS

Saturday, November 18, 2017

नई दिल्ली। सबको पता है कि नोटबंदी की रात 8 बजे के बाद भारत के कई शहरों में सर्राफा बाजार में तेजी से बिक्री हुई। गोल्ड कारोबारियों ने देर रात तक और कई कारोबारियों ने तो गोल्ड का स्टॉक खत्म हो जाने तक बिक्री की। सोने का भाव 60 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। सब जानते हैं कि इस रात सर्राफा बाजार में जो कारोबार हुआ उसमें पूरा का पूरा कालाधन लगा था परंतु चौंकाने वाली बात यह है कि मोदी सरकार 1 साल गुजर जाने के बाद भी उन तक नहीं पहुंच पाई है। अब सरकार इस जांच को ही बंद करने जा रही है। 

आयकर विभाग पिछले साल 8 नवंबर को (नोटबंदी की रात) कालेधन से सोना खरीदने वालों तक अभी तक नहीं पहुंच सका है। अब इन्वेस्टिगेशन विंग ने भी मान लिया है कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई करना मुमकिन नहीं है। कानून का हवाला देकर विंग के अफसरों ने खुद को लाचार करार दे दिया है।

रातोरात पुराने नोट और काला धन खपाने के लिए हुए इस कारोबार के बाद आयकर व तमाम जांच एजेंसियों ने दावे किए थे कि ऐसे खरीदार बच नहीं सकेंगे। इनका पता लगाकार कार्रवाई की जाएगी। सालभर बाद ऐसे किसी भी मामले में आयकर के क्षेत्रीय कार्यालय से कार्रवाई नहीं हो सकी।

अब प्रिंसिपल डायरेक्टर इन्वेस्टिगेशन आरके पालीवाल ने कहा है कि मौजूदा कानून के कारण कार्रवाई संभव नहीं है। पालीवाल के मुताबिक कानूनन दो लाख रुपए तक का सोना नकद खरीदने की छूट है। खरीदने-बेचने वालों ने कानून का लाभ लेते हुए जानबूझकर सीमा के मुताबिक बिल बनाए। ऐसे में कोई कानून से अलग जाकर कार्रवाई नहीं कर सकता।

इसलिए भी संभव नहीं
विशेषज्ञ और सीए आयकर की लाचारी के पीछे जांच में देरी को भी वजह मानते हैं। सीए स्वप्निल जैन के मुताबिक नोटबंदी के बाद सोना बिक्री और फिर रिकॉर्ड मेटेंन करने के लिए ज्वेलर्स को अच्छा-खासा समय मिल गया।

दरअसल, विभाग को भी जमा नकदी के आंकड़े 1 जनवरी को मिले। दो महीने से ज्यादा के समय में तो ज्वेलर्स ने अपने अकाउंट्स, बुक्स सब मैनेज कर लिए। इसके बाद आयकर की टीम ज्वेलर्स के यहां जांच के लिए पहुंची, लिहाजा खरीदारों के बारे में सुराग मिलना मुमकिन नहीं था। सभी ज्वेलर्स ने इस दौरान के अपने सीसीटीवी फुटेज भी हटा दिए थे।

आयकर ने भोपाल में कुछ खरीदारों को नोटिस जारी किए थे। वे भी ऐसे थे, जिन्होंने दो लाख से ज्यादा के एकमुश्त बिल बनवा लिए थे और जहां ज्वेलर्स ने भी खरीदारों से पेन कार्ड ले लिए थे। यह बात जरूर है कि कुछ ज्वेलर्स के नोटबंदी के दौरान ज्यादा कैश फ्लो को संदिग्ध मानते हुए नोटिस व अन्य कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामलों को आगे प्रवर्तन निदेशालय को भी सौंपा जा सकता है। उस स्थिति में भी कार्रवाई ज्वेलर्स तक ही सीमित रहेगी।

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