NARENDRA MODI इस मूक बघिर बालक के फैन हो गए, बालाघाट मप्र की है यह कहानी | MP NEWS

Sunday, November 26, 2017

यह तस्वीर है 10 वर्ष आयु के बालक तुषार उराड़े की। तुषार मूक बधिर है। वह न तो बोल सकता है और न ही सुन सकता है लेकिन उसके हौसले बुलंद हैं। तुषार शासकीय प्राथमिक शाला कुम्हारी मे कक्षा चौथी का छात्र है। बालाघाट जिला मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कुम्हारी का रहने वाला है तुषार। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज 26 नवंबर 2017 को मन की बात कार्यक्रम में बालक तुषार का नाम लिया तो वह सब की नजरों में आ गया। 

अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए तुषार के द्वारा किए गए प्रयासों की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की और उसके प्रयासों को अनुकरणीय बताया। तुषार अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए लोटा लेकर सड़क किनारे शौच के लिए बैठने वालों को भगाने के लिए सीटी बजाने का काम करता था। मूक बघिर होने के बाद भी उसके मन में अपने गांव को साफ सुथरा बनाए रखने की ललक थी। 

पहले तो उसके प्रयासों को गांव में किसी ने गंभीरता से नहीं लिया लेकिन जब जिला प्रशासन ने उसके प्रयासों को सराहा तो गांव के लोगों ने भी उसे गंभीरता से लिया और अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाने का संकल्प ले लिया। मूक बधिर बालक तुषार के प्रयास एवं प्रेरणा से ग्राम कुम्हारी अब खुले में शौच से मुक्त हो गया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी बालक तुषार के प्रयासों की सराहना करते हुए उसे बधाई दी है।

क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने तुषार के लिए

आपको भी सुन करके आश्चर्य होगा कि मध्यप्रदेश के एक 8 वर्षीय दिव्यांग बालक तुषार, उसने अपने गाँव को खुले में शौच से मुक्त कराने का बीड़ा उठा लिया। इतने व्यापक स्तर का काम और इतना छोटा बालक! लेकिन जज़्बा और संकल्प, उससे कई गुना बड़े थे, बृहत् थे और ताक़तवर थे। 8 वर्षीय बालक बोल नहीं सकता लेकिन उसने सीटी को अपना हथियार बनाया और सुबह 5 बजे उठ कर, अपने गाँव में घर-घर जा कर लोगों को सीटी से जगा करके, हाथ के action से खुले में शौच न करने के लिए शिक्षा देने लगा। हर दिन 30-40 घरों में जा करके स्वच्छता की सीख देने वाले इस बालक की बदौलत कुम्हारी गाँव, खुले में शौच से मुक्त हो गया। स्वच्छता को बढ़ावा देने की दिशा में उस नन्हे बालक तुषार ने प्रेरक काम किया। ये दिखाता है कि स्वच्छता की न कोई उम्र होती है, न कोई सीमा। बच्चा हो या बुज़ुर्ग, महिला हो या पुरुष, स्वच्छता सभी के लिए ज़रुरी है और स्वच्छता के लिए हर किसी को कुछ-न-कुछ करने की भी ज़रुरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
मन की बात 26 नवम्बर 2017 

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