कालाधन मामले में शिवराज सिंह के कृषि मंत्री पर शिकंजा कसा | MP NEWS

Thursday, November 23, 2017

जबलपुर। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के कृषि मंत्री डॉ.गौरीशंकर बिसेन कालाधन मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से बेरंग लौटे मंत्री को हाईकोर्ट ने पूर्व में जारी नोटिस का जवाब पेश करने तीन सप्ताह की मोहलत दी है। आरोप है कि कृषि मंत्री डॉ.गौरीशंकर बिसेन ने आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति जुटा ली है। इस मामले में जनहित याचिका दायर कर लोकायुक्त जांच की मांग की गई थी परंतु मंत्री बिसेन जांच करवाने के बजाए इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हे वापस हाईकोर्ट में भेज दिया। 

बालाघाट की लांजी सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक किशोर समरीते और पूर्व विधायक कंकर मुंजारे ने जनहित याचिका दायर की है। बुधवार को चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व न्यायमूर्ति राजीव कुमार दुबे की डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता समरीते के वकील ने दलील दी कि 2008 से 2012 के दौरान डॉ.गौरीशंकर बिसेन ने अकूत संपत्ति अर्जित की है। चूंकि यह सपंत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक है, अत: 2012 में यह जनहित याचिका दायर करके लोकायुक्त जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया।

19 जून 2014 को हाई कोर्ट ने लोकायुक्त जांच के दिए थे निर्देश
हाई कोर्ट ने इस मामले पर 2012 से सुनवाई शुरू की। इसी प्रक्रिया में 19 जून 2014 को लोकायुक्त जांच के निर्देश दे दिए। साथ ही यह भी साफ किया कि यदि लोकायुक्त जांच में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में सच्चाई पाई जाए तो लोकायुक्त अपराध पंजीबद्ध कर विधिवत कार्रवाई को अंजाम दे। हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक कंकर मुंजारे के हस्तक्षेप आवेदन पर गौर करने के बाद उन्हें लोकायुक्त को डॉ.गौरीशंकर बिसेन के खिलाफ दस्तावेज मुहैया कराने स्वतंत्र कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट लौटाया मामला
समरीते के वकील ने अवगत कराया कि हाईकोर्ट के 19 जून 2014 के लोकायुक्त जांच के निर्देश संबंधी आदेश के खिलाफ डॉ.गौरीशंकर बिसेन सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंच गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को उचित पाते हुए किसी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए केस वापस हाईकोर्ट लौटा दिया।

इसके बाद 20 मार्च को हाई कोर्ट ने डॉ.गौरीशंकर बिसेन को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। चूंकि अब तक जवाब प्रस्तुत नहीं हुआ इसलिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं। इस पर डॉ.बिसेन के वकील ने जवाब के लिए मोहलत मांग ली। हाई कोर्ट ने 3 सप्ताह का समय दे दिया। मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी।

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