सिंधिया के लिए तलाशा जा रहा है 'मिस्टर बंटाढार' जैसा संबोधन | MP ELECTION NEWS

Saturday, November 11, 2017

भोपाल। यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह के चक्रव्यूह की काट नहीं तलाश पाए और वहां भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दीं हैं। चुनाव प्रबंधन कार्यालय का भी विधिवत शुभारंभ कर दिया है। खास बात यह है कि चुनाव प्रबंधन की रणनीति 'जावली' की तर्ज पर होगी। भाजपा ने अपने बुद्धिजीवि प्रकोष्ठ के चुने हुए नेताओं और उद्दंड सोशल मीडिया एक्टिविस्ट को पहला काम सौंप दिया है। टारगेट है, ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए 'मिस्टर बंटाढार' जैसे किसी संबोधन की तलाश करना। भाजपा ने यह मान लिया है कि सिंधिया ही कांग्रेस का चेहरा होंगे और तय किया गया है कि शिवराज सिंह चौहान विकास की बातें भी करेंगे लेकिन बाकी भाजपा सिंधिया पर हमलावर हो जाएगी। 

2018 से 2019 तक काम करेगा कार्यालय
चुनाव प्रबंधन कार्यालय केवल विधानसभा चुनाव 2018 के लिए काम नहीं करेगा बल्कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भी यहीं से काम किया जाएगा। तय किया गया है कि चुनाव प्रबंधन ठीक उसी प्रकार किया जाएगा जैसा कि 2003 में किया गया था। 

ये 'जावली' रणनीति क्या है
जावली का प्रसंग वीर शिवाजी द्वारा मुगल शासक अफजल खां को उसी के घर में घुसकर मारने की रणनीति के लिए जाना जाता है। जावली महाराष्ट्र की एक छोटी सी रियासत थी। जावली के किले में मुगल शासकों ने शिवाजी को मारने की योजना बनाई थी। 10 नवंबर 1659 को अफजल खां ने इसी जावली में शिवाजी को एकांत में मिलने बुलवाया। जहां धोखे से वह शिवाजी की हत्या करना चाहता था, लेकिन शिवाजी के पास अपनी ही रणनीति थी, उन्होंने उसी के किले में अफजल खां को मार गिराया। इसी विजय गाथा की याद में भाजपा ने भी अपने चुनाव प्रबंधन कार्यालय के उद्धाटन के लिए 10 नवंबर की तारीख को चुना।

2003 में क्या हुआ था
'जावली' के नाम से उस समय आक्रामक चुनाव प्रचार शैली का विकास किया गया था। जावली टीम ने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को मिस्टर बंटाधार के नाम से अलंकृत किया था। भाजपा ने तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष डॉ गौरीशंकर शेजवार के बंगले में जावली का निर्माण किया था। तब अनिल माधव दवे जावली के प्रभारी हुआ करते थे। उनके साथ शैलेंद्र शर्मा, भारम भूषण, अतुल जैन और अजय मेहता भी चुनावी व्यूह रचना तैयार करने का काम करते थे। कहा जाता है कि जावली की रणनीति के कारण ही मप्र में उमा भारती की सरकार बन सकी। 

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