लीजिए शुरू हो गया चित्रकूट चुनाव फिक्सिंग का दूसरा चरण | MP ELECTION NEWS

Tuesday, November 14, 2017

भोपाल। जैसे की कयास लगाए गए थे कि चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव में सीएम शिवराज सिंह और अजय सिंह के बीच एक गुप्त समझौता हुआ था। इसका असर दिखने लगा है। चुनाव फिक्सिंग की अफवाहों में यह भी कहा गया था कि चित्रकूट चुनाव जीतते ही अजय सिंह, मप्र में सीएम कैंडिडेटशिप के लिए लगभग तय हो चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह में रोड़ बनकर खड़े हो जाएंगे, यह अब दिखाई भी देने लगा है। अजय सिंह समर्थकों ने उनका नाम सीएम कैंडिडेटशिप के लिए आगे बढ़ा दिया है। अजय सिंह के फैन पत्रकारों ने इस संदर्भ में कुछ लेख भी लिखे हैं। 

संक्षिप्त में याद दिला दें कि चित्रकूट उपचुनाव जीतने के लिए सीएम शिवराज सिंह ने काफी पहले से तैयारियां शुरू कर दीं थीं। क्षेत्र के लोकप्रिय डीएसपी पन्नालाल अवस्थी का इस्तीफा भी इसीलिए करवाया गया था कि उन्हे चुनाव में उतारा जा सके। सूत्रों का कहना है कि लास्ट मिनट पर फैसला बदल दिया गया। पन्नालाल अवस्थी को 2018 की तैयारियां करने के संकेत दिए गए और शंकर दयाल त्रिपाठी को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। सीएम शिवराज सिंह के इस फैसले के बाद ही अफवाहों का बाजार गर्म हो गया था। कहा गया कि शिवराज सिंह और अजय सिंह के बीच गुप्त समझौता हुआ है। सीएम ने अजय सिंह को चित्रकूट गिफ्ट कर दिया है। बदले में अजय सिंह कांग्रेस में कलह पैदा करेंगे। सीएम कैंडिडेट के लिए दावेदारी करेंगे और हर संभव कोशिश करेंगे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम फाइनल ना हो पाए। बता दें कि कांग्रेस ने अब तक सिंधिया का नाम फाइनल नहीं किया है लेकिन भाजपा ने यह मानकर तैयारियां शुरू कर दीं हैं कि मुकाबला ज्योतिरादित्य सिंधिया से ही होगा। 

चित्रकूट उपचुनाव में जीत का श्रेय स्वभाविक है कि अजय सिंह ही मिलना था लेकिन इसके साथ सोशल मीडिया और कुछ चुनिंदा अखबारों में जिस तरह के खेल प्रकाशित हुए वो चुनाव फिक्सिंग की अफवाह को मजबूत कर रहे हैं। लिखा जा रहा है कि चित्रकूट की धमाकेदार जीत के बाद अजय सिंह ने खुद को साबित कर दिया है और वो भी कमलनाथ व सिंधिया के समकक्ष आ गए हैं। समीक्षाएं लिखी जा रहीं हैं कि हाईकमान के लिए नाम का फैसला करना आसान नहीं होगा। अजय सिंह के नाम पर विचार करना जरूरी हो गया है। इन सबके बीच अजय सिंह चुप हैं। चुनाव से पहले अजय सिंह ने कहा भी था 'मेरे चेहरे में क्या कमी है।' अब यह चुप्पी कांग्रेस की कमर तोड़ने वाली साबित हो सकती है। 

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